रजत भट्ट/गोरखपुर: पिछले कुछ समय से हर एक व्यक्ति अपने फोन को बहुत गुप्त रखता है और किसी को जल्दी छूट नहीं देता है। इसके कई बड़े कारण हैं, जो कई बार सामने आते हैं। वहीं डीडीयूजी के साइकोलॉजिकल वत्सला पाठक ने बताया कि अक्सर लोगों के फोन का स्टेटस सिग्नल मिलता है।
इसके जरिए पता चला है कि वह बताती है कि उसके आदमी के दिमाग में क्या चल रहा है और वह किस सिचुएशन में है। बार-बार फोन पर लोग व्यवसाय में रहने वाले या फिर बर्डन लाइफ जैसे स्टेटस पर आते हैं तो यह एक रेड सिग्नल होता है। कुछ समय पहले डीडीयूजी यूनिवर्सिटी में करीब 200 बच्चों की पढ़ाई हुई थी।
70 से 80 % लोग
असल में ये बात सामने निकल कर आई कि करीब 70 से 80 फीसदी लोगों को कोई ना कोई परेशानी थी और उस परेशानी को वो लोग शेयर भी नहीं करना चाह रहे थे. क्योंकि उन्हें जो बातें शेयर करने को मिलीं, वे हेसडिज़ाइनरी और डेस्टिनेशन हो रही थीं। ये छोटी-छोटी चीजें ही लोगों की मौत की ओर ले जाती हैं। कहावतें कहती हैं कि अगर आपके आस-पास ऐसे कुछ लोग हों तो उनसे बातचीत करें और उन्हें कंफर्ट दें।
विटामिन डी का होता रोल
वहीं पिछले साल करीब 10 से ज्यादा ऐसे मामले सामने आए, जिनमें डिप्रेशन के कारण लोगों की मौत हो गई। साइकोलॉजिकल वत्सला पाठक बताते हैं कि ठंड से लोगों पर अवसाद का असर सबसे ज्यादा होता है। क्योंकि सूरज की रोशनी कम होती है और लोगों के अंदर विटामिन डी की कमी होती है।
अवेयरनेस प्रोग्राम जरूरी
विटामिन डी की कमी से लोगों में अवसाद की संभावना बढ़ रही है। लेकिन लोगों को अवसाद से बाहर निकालने के लिए एक बेहतर उपाय है। साथ में अवेयरनेस प्रोग्राम भी चलाना चाहिए। अक्टूबर और जनवरी में भी स्कॉल में अवेयरनेस प्रोग्राम भी चलाया जाएगा ताकि बच्चों को सावधान किया जा सके।
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पहले प्रकाशित : 14 अक्टूबर, 2023, 12:57 IST
