Homeछत्तीसगढ़नवरात्रि-2023-अनोखा-पंडाल-मां-दुर्गा-बना-आकर्षण-केंद्र-दर्शन-दिखाई गई धर्मों की झलक- News18 हिंदी

नवरात्रि-2023-अनोखा-पंडाल-मां-दुर्गा-बना-आकर्षण-केंद्र-दर्शन-दिखाई गई धर्मों की झलक- News18 हिंदी


रामकुमार नायक, रायपुरः पूरे देश में 15 अक्टूबर से शुरू हो रही शरद ऋतु की धूम मची हुई है। छत्तीसगढ़ की राजधानी, रायपुर 500 अधिक जगह में दुर्गा की सजाए गए हैं। जहां माता देवी की पूजा से संपूर्ण भक्ति भाव की प्राप्ति होगी। वहीं राजधानी के बैरनबाजार इलाके के दुर्गा बाजार में सामाजिक मेलजोल की झलक देखने को मिल रही है। राजधानी में ये एक अनोखी चीज़ है, जिसमें सभी धर्म के लोग सदस्य बने हुए हैं।
आपको बतायें कि, बैरन मार्केट में एक तरफ चर्च और दूसरी तरफ मस्जिद के बीच मुख्य मार्ग पर नवरात्रि के लिए प्रवेश का निर्माण किया गया है। इस अनपेक्षित में सभी धर्मों के लोगों के सहयोग से नवरात्रि का उत्सव मनाया जाता है।

नवरात्रि में सभी धर्म के लोग शामिल होते हैं
इसमें खास बात ये है कि हिंदू, मुस्लिम, सिखा, इसाई, जैन, बौद्ध सभी धर्मों के लोग समिति के सदस्य भी हैं। दोपहर-शाम पूजा करने के लिए ईसाई समाज के जॉनसन जेकब शेयर करते हैं। सभी प्रयास कर रहे हैं कि रात में होने वाली महाआरती में सामाजिक सहयोग का संदेश दे सुविधा शामिल हो। यहां अंतिम दिन भंडारे में हजारों आस्थावान प्रसादी ग्रहण किये जाते हैं।

दुर्गा स्थापना के 22 साल भर
मां मंगला काली दुर्गाोत्सव समिति के अध्यक्ष मनोज नारवानी ने बताया कि उनकी समिति हिंदू है, मुस्लिम, सिखा, इसाई, जैन, बौद्ध सभी धर्म की है. यहां दुर्गा स्थापना करते हैं 22 साल भर हो गए हैं, इस बार 23 वां साल है. उन्होंने बताया कि सामने चर्च बना हुआ है, बायीं ओर मंदिर, पीछे की तरफ मस्जिद बनी हुई है. बीच में माता का सामान बनाया जा रहा है. यहां सभी धर्म के लोग राष्ट्र पर्व में सहयोग करते हैं। देश में धर्म संप्रदाय के नाम को लेकर हमेशा विवाद होता रहता है, लेकिन यहां पर सर्व धर्म समभाव की झलक दिख रही है। ईसाई समुदाय के जॉनसन जेकब ने पिछले दिनों नवरात्रि की तैयारी के बारे में बताया था 3 महीने से चल रही है. समिति की बैठक तय हो चुकी है, अंतिम कैसा रहता है मूर्ति कैसी बनवानी है, ये सभी चर्चा सभी धर्मों के लोगों के निर्णयों पर आधारित है। उन्होंने बताया कि यहां पर आज तक कभी कोई विवाद भी नहीं हुआ है.

टैग: स्थानीय18, नवरात्रि उत्सव, धर्म 18



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