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10 साल की कैद में सीआरपीएफ के दो जवानों पर लगा हथियार रखने का आरोप


उत्तर प्रदेश की एक अदालत ने 2010 में रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के दो हवलदार और अन्य सुरक्षा कर्मियों को हथियार और गोला-बारूद की आपूर्ति करने के लिए 24 लोगों को 10 साल की सजा सुनाई थी। और उनसे हर एक पर 10-10 हजार रुपए की कीमत भी तय होती है। अपर जिला अभियोजक (एडीजीसी) प्रताप सिंह मौर्य ने बताया कि जिला सत्र न्यायालय के विशेष न्यायाधीश विजय कुमार ने पार्टियों को अंतिम निर्णय और शुक्रवार को निर्णय लेने की सलाह दी।

मौर्य ने बताया कि इस मामले के मुख्य अतिथि यशोदानंद की पाठ्यपुस्तक के अध्ययन के दौरान ही मृत्यु हो गई थी। वह इलाहाबाद (अब सारगर्भित) में यूपी पुलिस का सेवानिवृत्ति उप-निरीक्षक था।

अपर जिले के कट्टरपंथियों ने कहा कि जिन अन्य लोगों को सजा सुनाई गई थी, उनमें विनोदी पैन और विनेश कुमार (काउंसिल में हवलदार), नाथीराम (काउंसिल, जो पुलिस प्रशिक्षण कॉलेज में शामिल थे), कांस्टेबल राम किशन शुक्ला, रामकृपाल, सुशील मिश्रा, चौधरी कुमार सिंह, राजेश रॉयल, अमर सिंह, वंश लाल, एलागोनक कुमार पांडे, अमरेश मिश्रा, दिनेश कुमार, राजेश कुमार, मनीष राय, मुरलीधर शर्मा, विनोद कुमार सिंह, ओम प्रकाश सिंह, राज्य पाल सिंह, लोकनाथ, बिल्डर लाल, आकाश, दिलीप राय और शंकर शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि उनमें से दिलीप राय, आकाश, मुरलीधर शर्मा और शंकर आम नागरिक हैं, जो तीन व्यक्तियों से वर्तमान में उत्तर पुलिस और पीएसी (प्रांतीय सशस्त्र कांस्टेबुल) में सेवारत हैं। मौर्य ने कहा कि ये सभी जमानतदार थे और अदालत ने अपना फैसला सुनाने के लिए उन्हें न्यायाधीश में ले लिया था और दोषी ठहराए जाने के बाद उन्हें जेल भेज दिया गया था।

पूरा मामला क्या है?
घटना के बारे में विस्तार से बताते हुए एडीजीसी ने कहा कि 10 अप्रैल 2010 को पुलिस के विशेष कार्यबल (एसटीएफ) ने जिले के सिविल लाइंस थाना क्षेत्र के आबानगर रेलवे क्रॉसिंग के पास से गुड़गांव के दो हवेलियों को गिरफ्तार किया और उनके पास से उन्होंने एक्सास राइफल, कार्ट्रिज और वसीयत बरामद की।

मौर्य ने बताया कि उसके बाद इन दोनों से मिली जानकारी के आधार पर पूछताछ ने यशोदानंद (सेवानिवृत्त उपनिरीक्षक) और शिक्षा पुलिस प्रशिक्षण कॉलेज में वैज्ञानिक कांस्टेबल नाथीराम को गिरफ्तार कर लिया।

उन्होंने बताया कि 29 अप्रैल 2010 को लूट के आमोद कुमार के साथ एक मामला सामने आया था, जिसमें तीन लोग यशोदानंद, विनोद पासवान और विनेश कुमार शामिल थे। उनके अनुसार यशोदानंद के पास से 1.75 लाख रुपये की वसूली की गई और उनके निशानदेही पर नाथीराम को पीटीसी से गिरफ्तार कर लिया गया और उनके खिलाफ भी मुकदमा दर्ज कर लिया गया।

पुरातन काल के अनुसार, नाथीराम के पास से एक डायरी बरामद हुई थी और उस डायरी के आधार पर जांच के दौरान 21 अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इस मामले में कुल 25 लोगों की गिरफ़्तारी हुई थी जिसमें यशोदानंद की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो जाने से शेष 24 लोगों को सज़ा सुनाई गई थी।

टैग: सीआरपीएफ, नक्सल, रामपुर जिला न्यायालय



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