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चक्रवाती तूफ़ान: कैसे हैं समुद्री तूफ़ान! रखा ‘तेज’ का नाम, कितनी होगी तबाही? जानें


नई दिल्ली। अरब सागर में सोमवार की रात एक समुद्री तूफान का खतरा मंडरा रहा है, जो समुद्री तूफ़ान में तब्दील हो सकता है। अगर ये तूफ़ान बनेगा तो इसका नाम ‘तेज’ होगा. इसके पहले जो स्टॉर्म आया था उसका नाम बिपरजॉय रखा गया था। इससे भारत के महासमुंद, राज मान्यता, गुजरात के जंगलों के तटीय इलाकों में तबाही मची थी। सीज़न साइंस एक नहर विभाग का कहना है कि अरब सागर के दक्षिण पूर्वी तट पर समुद्री परिसंचरण की स्थिति बन रही है।

नए तूफ़ान को लेकर बड़े पैमाने पर खतरे पैदा हो गए हैं और कहा जा रहा है कि इससे भयंकर तबाही मच सकती है। इस संभावना के बाद साजिद ने अरब सागर की हलचलों पर निगरानी बढ़ा दी है। रियल्टी, प्राइवेट सीज़न एजेंसी स्काईमेटवेदर ने कहा है कि अरब के दक्षिण पूर्वी देशों में पिरामिड क्षेत्र के बगल में अरबों के समुद्र तट पर ज्वालामुखी बन रही हैं, जहां सकारात्मक आयोडी और मामूली रूप से अनुकूल एमजेओ के कारण गर्म हिंद महासागर में एक साथ समूह में जल्द ही एक समुद्री विक्षोभ का जन्म हुआ है। कर सकते हैं.

कैसे बने हैं साइकॉलोनिक मेमोरियलटॉर्म
सीज़न ने बताया कि साइक्रोलोनिक मेमोरियल टॉर्म कैलिफ़ोर्निया तूफ़ान हैं और ये समुद्र की गर्म सतह के ऊपर बने हुए हैं। भूमध्योतिरेखा के उस हिसासे जहां सूर्य की सीधी किरणें गिरती हैं; वहां समुद्र का पानी बिल्कुल गर्म होता है। जब इसका तापमान 25-26 डिग्री तक पहुंच जाता है तो साइलॉन बन का संकट बढ़ जाता है। एक्पर्ट्स का कहना है कि भारत जैसे गर्म एशिया में साइक्लोऑन बने हुए हैं।

समुद्र का तापमान बढ़ने से साइलोन का संकट
जब समुद्र का तापमान बढ़ता है तो उसकी ऊपरी हवा भी गर्म हो जाती है और यहाँ की सतह के कारण हल्की हो जाती है और ऊपर उठती है। इस दस्तावेज़ को चारों ओर से हवा की आपूर्ति के लिए दायर किया गया है, लेकिन नीचे की तरफ से हवा की आपूर्ति कम हो जाती है। जैसे कि यहां यूनिवर्सल हवाई जहाज़ है; वे भी हॉट बेस टॉप पर हैं। यह चक्र एक बार शुरू होता है तो फिर यह लगातार बढ़ता जाता है और इस प्रकार बादल बनते जाते हैं। यह समुद्र में एक विशालकाय तूफ़ान की तरह नज़र आते हैं और इसे साइलोन कहा जाता है।

भारत में 13 देश शामिल हैं बारी-बारी से समुद्री तूफानों के नाम
अमेरिका में आने वाले तूफानों का नामकरण 1953 से शुरू हुआ जबकि हिंद महासागर में इसकी शुरुआत 2004 में हुई। यहां भारत समेत 13 देश हैं जो बारी-बारी से तूफान को नाम देते हैं। इनमें भारत, बाक़ीअनामिक्लादेश, कोटा, म्यान्मार, ओमान, सऊदी अरब, गुलामी, श्रीलंका, ईरान, कतर, छात्र, विद्यार्थी और यमन शामिल हैं। संयु क्त्रोत अजिरात की वेरियंट मेट्रोलाजिकल आर्गेनाइजेशन ने इसके लिए नियम तय किए हैं। केवल उन्ही तूफानों का नामकरण होता है जिनका क्रम गति कम से कम 63 किमी प्रति घंटा हो।

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अगले तूफ़ान को भारत ने ‘तेज’ नाम दिया, शमिल में कई नाम हैं
2017 में बैन यूनाइटेडलादेश ने स्टॉर्म को ओखी नाम दिया था और इसके बाद सोमालिया में आए स्टॉर्म को भारत ने स्पीड नाम दिया था। अब 2023 में आए तूफान तूफान का नाम यूक्रेन ने बिपरजॉय रखा था और इसके बाद आने वाले तूफान का नाम भारत ही तय करना चाहता था। भारत ने अगले तूफान को ‘तेज’ नाम दिया है। भारत में आने वाले तूफानों के कई नाम सामने आए हैं जिनमें मुरासु, आग, नीर, प्रभंजन, घुरनी, अंबुद, जलधि और वेग शामिल हैं।

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