रामकुमार नायक, रायपुरः पूरे देश में नवरात्रि की धूम मची हुई है, देवी मां के भक्त बड़े ही हर्ष उल्लास के साथ देवी की पूजा कर रहे हैं। वहीं छत्तीसगढ़ में भी कई ऐसे स्थान हैं जहां हां जहां पर दुर्गा माता अलग-अलग तरह की दुकानें हैं। यहां पर माता के कई शक्तिपीठ प्रतिष्ठित हैं, जिनमें से एक दंतेवा जिले का सबसे प्रसिद्ध शक्तिपीठ माना जाता है। बताया जाता है कि यह शक्ति पीठ माता दंतेश्वरी को समर्पित है। आपको बता दें कि, इस मंदिर का निर्माण 14वीं शताब्दी में हुआ था। ऐसा भी कहा जाता है कि दंतेवाड़ा जिले का नाम देवी दंतेश्वरी के नाम पर ही लिखा गया था।
दंतेश्वरी मंदिर का इतिहास
माता दंतेश्वरी देवी का मंदिर 600 वर्ष पुराना है, जो भारत की विरासत स्थल और वन्य क्षेत्र के धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक इतिहास का प्रतिनिधित्व करता है। वहीं अपनी समृद्ध वास्तुकला, देहाती धन और अपने जीवंत बौद्ध मठों के साथ, दंत माझीश्वरी इस मंदिर को इस क्षेत्र के लोग सबसे महत्वपूर्ण आध्यात्मिक केंद्र के रूप में मानते हैं।
इसलिए नाम दंतेश्वरी
दंतेवाड़ा के शक्तिपीठ को लेकर ऐसी ही मान्यता है, कि यहां माता सती के दांत मनाए गए थे, इसी कारण से इस इलाके का नाम दंतेवाड़ा पड़ा, वहीं दंतेवाड़ा माता के स्वरूप को भी दंतेश्वरी मां के नाम से ही जाना जाता है। दांते में स्थित सलेम स्ट्रामले मंदिर का निर्माण 14वीं शताब्दी में चालुक्यवंश के राजवंश में हुआ था। इस मंदिर की वास्तुकला दक्षिण भारतीय शैली में झलकती है। दंतेश्वरी देवी की मूर्ति के खास बात यह है कि 6 भुजाओं वाली काले रंग की मूर्ति मंदिर के गर्भगृह में स्थापित है, 6 भुजाओं वाली देवी के हाथ में शंख खड़क, त्रिशूल और बाएं हाथ में घंटी, पद्ध और राक्षस का धड़ लिया गया है। . चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि पर लाखों की संख्या में इन मंदिरों में देवी दर्शन के लिए आते हैं।
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पहले प्रकाशित : 16 अक्टूबर, 2023, 11:23 IST
