पारंपरिक यादव/अंग्रेज़ी. दही-जलेबी को बेचने में काफी समय लग गया है. देश के कई आदर्शों में आज भी दही-जलेबी को लोग खाना पसंद करते हैं। . दही जलेबी ऐसी की जिसका मुंह एक बार लग जाए तो यहां बार-बार आता है। इसके साथ ही इस दुकान की मशहूर कचौड़ी भी है.
शहर के कटरा स्थित नेतराम मूलचंद की दुकान पर स्थित कचौड़ी और दही जलेबी का कोई तोड़ नहीं है। यह दुकान 1855 में मयंक अग्रवाल के दादा के परदादा ने खोली थी। तब से लेकर अभी तक यहां की कचौड़ी बहुत मशहूर है और सुबह में दही जलेबी का क्रेज सबसे ज्यादा है। दही-जलेबी का स्वाद ही अलग है जिसका मिश्रण शामिल होने वाला हर एक बार एक बार जरूर खाना चाहता है। दही-जलेबी और कचौड़ी खाने के लिए तो यहां सुबह से लेकर देर शाम तक भीड़ लगी रहती है।
दुकान का नाम यहां पर ही बन गया है
नेतराम की दुकान इतनी प्रसिद्ध हो गई है कि उनके नाम पर यहां एक नाव जो कटरा नदी के बीचों-बीच स्थित है। हालाँकि इस दस्तावेज़ का कोई सरकारी रिकॉर्ड नहीं है। लेकिन लोग कहते हैं-कहते हैं इस नोटिफिकेशन का नाम नेतराम क्रैकर रख दिया गया है। इनकी दुकान पर गोदाम और सफाई का खास ख्याल रखा गया है। दुकान पर खाने के अलावा दुकानदारों की सुविधा भी उपलब्ध है।
चौथी पीढ़ी ने सशुल्क दुकान बनाई
दुकान के संचालक अमालिक कर्मचारी हैं कि यह हमारी पाँचवीं पीढ़ी है। जो इस व्यवसाय को आगे बढ़ा रही है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि हमने आज तक अपनी गुणवत्ता में कोई कमी नहीं छोड़ी है। आज भी ग्राहक आते हैं और वह ग्राहक जाते हैं। हमारे यहां की कुरकुरी जलेबी भी दही के साथ खाने में लोग खूब आनंद लेते हैं और चहक-छक कर खाते हैं। कचौड़ी और जलेबी खाने यहां दूर-दूर से आते हैं। लोग.नेताराम-मूलचंद की मिठाई तो शहर में अपने आप में एक ब्रांड है.शादी-समारोह में लोग यहां की सबसे अच्छी मिठाई लेना पसंद करते हैं. इसके अलावा यहां की देसी घी से बनी पूड़ी, कचौड़ी और जलेबी भी मशहूर है. जिसका स्वाद लेने दूर-दराज से लोग आते हैं।
कैसे तैयार होती है कुकुरी जलेबी
जलेबी बनाने वाली दुकान पर हमारे जिले के अन्य स्थानों से सबसे अलग चीजें होती हैं। हम शुद्ध देसी घी में अच्छे होते हैं और हमारे जिलों में बेसन की मात्रा सबसे ज्यादा होती है। इसी कारण से ये शाम तक जस की तस ताजी और कुकुरी बनी रहती है।
इसके अलावा इस दुकान की सुविधा क्या है
नेतराम की दुकान पर दही जलेबी कचौड़ी के अलावा कई तरह की मिठाई मिलती है. जिसमें रसमलाई, मालपुआ, बालूशाही का टेस्ट लाजवाब मिलता है। यहां ₹40 की 100 ग्राम जलेबी और 80 रुपए की प्लेट कचौड़ी मिल मिलती है. जिसके साथ तीन रेसिपी भी उपलब्ध हैं और रायता और रेसिपी अलग से होती है. इनमें दमालू, कद्दू-आलू और मटर पनीर या छोला रहता है. इसके साथ ही यहां आप खोवा और चने से बनी मिठाई के स्वाद का स्वाद ले सकते हैं. जिसमें गुलाब जैम, काला जैम, रस मलाई, मालपुआ, बालूशाही, पर्लचूर के लोध, मलाई रोल, गुझिया आदि शामिल हैं। कीकी बर्फी और राजस्थानी घेवर भी यहां मिलते हैं। दालमोठ की कई वेरायटी और ढोलकला के अलावा यहां दमालू-समोसा और आइस्क्रीम का आनंद भी लिया जा सकता है। मयंक के अनुसार उनकी दुकान सुबह आठ बजे से रात दस बजे तक खुली रहती है।
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पहले प्रकाशित : 17 अक्टूबर, 2023, 12:15 IST
