अभिषेक मथुरा/हापुड़ः अगर आपकी कमर में बार-बार दर्द रहता है, तो सावधान रहें और चिकित्सक को सलाह दें। कमर का दर्द रीढ़ की हड्डी में दर्द के कारण बन सकता है। ऐसा हमने नहीं, बल्कि बाजारू जिले के ग्राहकों ने दावा किया है। अरेस्ट के बुजुर्ग फ़िजीशियन डॉ. रिपुदमन शर्मा का कहना है कि जिले में हर 100 में से 5-6 मरीज़ों की हड्डी में टीबी की बीमारी से ग्रसित होने के मामले सामने आ रहे हैं. ऐसे में आयुर्वेदिक चिकित्सकों और अपना उपचार शुरू हो गया।
बता दें कि अत्याधुनिक जिले के सामाजिक स्वास्थ्य केंद्र की नाव में सबसे ज्यादा मरीज कमर दर्द से पीड़ित हैं। यहां दोस्ती को बुजुर्ग फिजीशियन डॉ. अशरफ अली को जाते हुए देखा। डॉ. अशरफ अली का कहना है कि टीबी की बीमारी के लिए परेशानी का सबब बन रही है।
सबसे ज्यादा परेशानी उन व्यापारियों को हो रही है, जो कि दुकानदारों की हड्डियों में टीबी निकाल रहे हैं। इसकी पुष्टि अभ्यर्थी के एक्सरे में हो रही है। उन्होंने बताया कि रीढ़ की हड्डी में टीबी होने का आलम यह है कि करीब 100 में से हर 5 या 6 मरीज इसकी शिकायत मिल रही है। बिजनेसमैन की हड्डियों में टीबी के अभी तक सिर्फ एक महीने में कुल 90 मरीज सामने आए हैं।
ये हैं रीढ़ की हड्डियों में टीबी के लक्षण
स्थानीय 18 से बातचीत करते हुए मध्य प्रदेश के बुजुर्ग फिजीशियन डॉ. रिपुदमन शर्मा ने बताया कि रीढ़ की हड्डी में होने वाले टीबी के लक्षण को सबसे पहले पहचानना जरूरी है। उन्होंने बताया कि अगर आपकी कमर में पिछले छह महीने या साल से दर्द हो रहा है, तो उस पर नज़र नहीं डालनी चाहिए। एम्प्रेचर की हड्डी में टीबी की पहचान सबसे जल्दी होती है एम् रीस्ट्री और ब्लड की जांच से। इसके अलावा दवा में शामिल है कि दर्द रहता है शाम के समय बुखार और वजन भी धीरे-धीरे कम हो रहा है, भूख लगनी बंद हो गई है तो जरूरी है कि सबसे पहले डॉक्टर को दिखाएं।
समय रहते इलाज का इलाजउ
नहोंने बताया कि अगर इसमें मरीज़ के बीच प्रतिस्पर्धा की जाती है, तो यह बीमारी के लिए मुश्किल है और मुश्किलें खड़ी कर सकती है। एसोसिएट्स की हड्डी में टी.बी. की शिकायत पर एस.एम. की हड्डी में धीरे-धीरे गलनी शुरू हो जाती है, जिससे मरीज़ों की परेशानी और बढ़ जाती है। उन्होंने बताया कि एक महीने में करीब 90 गरीबों का इलाज सामने आया था। उन्हें आवश्यक दवाएं दी गई हैं, जिससे गरीबों को काफी हद तक लाभ भी मिल रहा है।
दिमाग पर भी असर कर रही टी.बी.आई
अत्याधुनिक के बुजुर्ग फ़िजीशियन डॉ. रिपुदमन शर्मा ने बताया कि टीबी की बीमारी सिर्फ मरीजों की हड्डियों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि दिमाग की बीमारी के मरीज भी सामने आ रहे हैं। यह रहस्योद्घाटन संग्रहालय में हुआ है। उन्होंने बताया कि टीबी, ब्रेन, स्केल आदि कहीं भी हो सकते हैं, इसलिए परेशानी महसूस होने पर चिकित्सक को दिखाना जरूरी है।
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पहले प्रकाशित : 18 अक्टूबर, 2023, 11:01 IST
