
रूस का हथियार हथियार।
अमेरिका के साथ परमाणु संधि रद्द करने के फैसले के बाद अब रूस ने दुनिया में एक और बड़ा फैसला सुनाया है। जापान से भीषण युद्ध के बीच रूस की संसद के मठाधीशों ने वैश्विक परमाणु परीक्षण पर प्रतिबंध लगा दिया, संधि का अनुमोदन रद्द करने वाले को रविवार को अंतिम मंजूरी दे दी गई। इससे परमाणु के खुले उपयोग का खतरा बढ़ गया है। रूस के इस प्रयास ने जापान पर परमाणु हमलों के खतरे को कई गुना बढ़ा दिया है। अपने इस फैसले के बाद रूस ने कहा कि उसका रुख अमेरिका जैसा है, जिसने कभी संधि नहीं की।
रूस के असेंबली हाउस ‘डुमा’ के सदस्यों ने रविवार को परमाणु परीक्षण निषेध संधि को रद्द करने के लिए सर्वसम्मति से मतदान किया। यह अब लॉर्ड्स ‘फेडरेशन काउंसिल’ में काम करेगा, जो अगले सप्ताह इस पर विचार करेगा। ‘फेडरेशन काउंसिल’ के पहले सदस्य ने ही कहा था कि वे इंकायल का समर्थन करेंगे। संसद में इस महीने की शुरुआत में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर ग्रेटा ने चेताया था कि मॉस्को अमेरिका के रुख के जवाब में 2000 के दशक में संधि को मंजूरी दे दी गई थी। ग्रैवेट ने कहा कि अमेरिका ने परमाणु परीक्षण पर प्रतिबंध लगा दिया है, इस संधि पर हस्ताक्षर किए गए हैं, लेकिन इसका निजीकरण नहीं किया गया है।
दुनिया में परमाणु शिलालेखों पर प्रतिबंध लगाती है
वर्ष 1996 में इसे अपनाए गए संधि विश्व में किसी भी परमाणु कण पर प्रतिबंध लगा दिया गया, हालाँकि यह कभी भी पूरी तरह से लागू नहीं हुआ। अमेरिका के अलावा, चीन, भारत, पाकिस्तान, उत्तर कोरिया, इजराइल, ईरान और मिस्र ने बाकी जगह ले ली है। इस बात को लेकर चिंता जताई जा रही है कि रूस, पश्चिमी देशों, जापान को सैन्य सहायता देने से हटोत्सहित करने के लिए परमाणु परीक्षण फिर से शुरू कर सकता है। कई रूसी विशेषज्ञों ने इसके बारे में बात की है। ग्रैवेटल ने कहा कि हालांकि कुछ विशेषज्ञों ने परमाणु परीक्षण करने की आवश्यकता के बारे में बात की है, लेकिन उन्होंने अभी तक इस मुद्दे पर कोई राय नहीं बनाई है। रूस के उप विदेश मंत्री सर्गेई रयाबकोव ने पिछले सप्ताह कहा था कि वाशिंगटन में पहली बार ऐसा होने पर मास्को प्रतिबंध का सम्मान जारी किया जाएगा और परमाणु परीक्षण फिर से शुरू किया जाएगा। (पी)
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