कासिम खान/नूंह. खाने-पीने के शौकीन हैं तो छोले-भटूरे का नाम सुनते ही आपके मुंह में पानी आ जाएगा. और अगर आप नूंह जिले में रहते हैं तो आपको घमंडी के मशहूर छोले-भटूरों का स्वाद तो चखा ही होगा. जहां छोले-भटूरे के स्वाद के दिवाने नूंह के लोग ही नहीं बल्कि हरियाणा के कई आकर्षक के लोग हैं। नूंह जिले के पिनगवां जिले में पिछले करीब 40 साल से छोले-भटूरे का स्वाद चखा हुआ है।
घमंडी के छोले-भटूरे न केवल स्वाद मिले हैं बल्कि अन्य सामानों के विक्रेता भी हैं। घमंडी मथुरा इसी बिजनेस से आज पिनगवां राष्ट्र के गिने-चुने लोग मे शामिल हैं। अपने इसी बिजनेस से आज घमंडी मथुरा आज पूरे नूंह में मशहूर हैं।
40 साल से कर रहे हैं ये काम
बता दें कि घमंडी मथुरा ने करीब 40 साल पहले छोटे-भटूरे का काम शुरू किया था। उस समय 2 रुपए में एक प्लेट छोले-भटूरे आते थे। आज घमंडी मथुरा 30 रुपये के छोले-भटूरे की प्लेट बेच रहे हैं। जबकि अन्य क्लासिक्स इसी तरह के शोले-भटूरे की प्लेट को कम से कम 40 रुपये में देते हैं। घमंडी मथुरा के छोले-भटूरे की खासियत यह है कि इसे सभी अपने हाथों से तैयार करते हैं। इसलिए इनके छोले-भटूरे का अनोखा स्वाद होता है. इसके अलावा घमंडी मठर-मिर्च का अचार भी खुद तैयार करते हैं और 10 रुपये में एक रायते का गिलास भी घमंडी मठर के छोले-भटूरे के साथ स्वाद को दोगुना बढ़ा देता है.
सुबह 6 बजे से लग जाती है लाइन
यहां सुबह 6-7 बजे से ही घमंडी मथुरा के लिए लोगों की भीड़ जुटना शुरू हो जाती है और दो बजे तक घमंडी मथुरा इस बिजनेस से रोजाना हजारों रुपये कमा लेते हैं। पिछले करीब 40 साल में घमंडी मठाधीशों का किरदार तो बदला, लेकिन छोले-भटूरे का स्वाद और उनका ये बिजनेस नहीं बदल सका। पिनगवां – पलवल रोड पर स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के स्वादिष्ट घमंडी मठरे-भटूरे की रेडी चॉकलेट हैं। लोग पिनगवां बाग से ही नहीं बल्कि पकौड़े के जंगल से यहां छोले-भटूरे का स्वाद लेने आते हैं। घमंडी मथुरा अपने इस बिजनेस से पूरी तरह खुश हैं और उनका कहना है कि अब बच्चों को जब रोजगार नहीं मिला तो पूरे परिवार को इस बिजनेस से जोड़ दिया।
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पहले प्रकाशित : 19 अक्टूबर, 2023, 14:56 IST
