धीरज कुमार/किशनगंज : अन्योन्याश्रित कहानी भी चटपटी है। ये थी 15 हजार की नौकरी. परिवार बढ़ा तो घर चलाना मुश्किल हो गया। ऐसे में कुछ अलग करने की चाहत. दशमांश ने लोगों को स्वस्थ्य माना। फिर खोली गयी गुमशुदगी की दुकान. अब किशनगंज के सुभाष पाली चौक पर गोदाम की दुकान चल रही है।
सबसे पहले एक होटल में 15 हजार लोगों ने नौकरी की थी। दशरथ ने यह निर्णय लिया कि नौकरी नहीं की जा रही है और फिर क्या खोल दिया गया है और फिर क्या है। इनमें से एक है सुबह-सुबह पूरी सब्जी और गरमा-गरम जलेबी। जहां खाने के लिए दूर-दराज से लोग आते हैं।
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लोक 18 बिहार से बात करते हुए दिसंबर में बताया गया कि सबसे पहले उन्होंने किशनगंज के एक होटल में नौकरी की थी. 15 हज़ार किलो घर से चलना बहुत मुश्किल था। ऐसे में किशनगंज के सुभाष पाली चौक पर गोदाम की दुकान खोली गई। आज आलम यह है कि उनके यहां नाश्ता करने के लिए सुबह-सुबह लोगों की लंबी भीड़ उमड़ती है। उन्होंने बताया कि हमारे यहां पूरी सब्जी जलेबी और शाम को कचौड़ी चाय और स्वादिष्ट चीजें भी हैं।
दशरथ ने बताया कि उनके अलॉटमेंट खाने वालों के लिए पूरे देश में सबसे ज्यादा लोग आते हैं, जिनमें ज्यादातर नौकरी पैसे वाले लोग रहते हैं। यहां जानिए सुबह की पूरी सब्जी और जलेबी का आनंद लेते हैं. जब हमने मुनादी की बात पूछी तो दशमीर ने बताया कि नौकरी कितनी अच्छी है, छोटे सी की दुकान में परिवार के लोग खुश हैं। नौकरी से बेहतर कमाई भी सब अच्छा चल रहा है।
₹30 में पूरी, सब्जी और जलेबी मिलती है
दशमीर की दुकान में ₹20 में तीन पूरी और सब्जी और ₹10 में जलेबी जो कि सुबह के लिए मिलती है। वहीं इसके अलावा शाम के समय कचौड़ी और चाय भी मिलती है। हर रोज 200 प्लेट रेस्टोरेंट आसानी से बिक जाता है। वही जलेबी की बिक्री पूरे दिन होती है। शाम के समय चाय और कचौरी खाने भी लोग आते हैं।
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पहले प्रकाशित : 20 अक्टूबर, 2023, 16:30 IST
