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कभी जंगल था बसेरा, आज आदिवासियों पर थिरकता है आदर्श से कदम, वनटांगिया महिलाएं हैं प्रेरणा का उदाहरण


मूल रूप से पहचाने जाने वाले समुद्र तट तक स्थित थे, ओडिशा राज्य के कई महत्वपूर्ण शहरों में स्थित जलवा ज्वालामुखी देखने की बात अचरज में स्थित है। जो जंगल में बसे अपने गांव में ही सकुचाई सी रहती है, आज फैशन और कल्चर शो में उनके कदम से लेकर लैबरेज तक आगे बढ़ रहे हैं। दरअसल योगी सरकार के मिशन शक्ति की प्रेरणा के पीछे यह आश्चर्यजनक सत्य है।

नारी स्वावलंबन और सम्मान के दावों से बदलाव की यह दास्तां है ग़ारोज के वनटांगिया गांव जंगल तिकोनिया नंबर तीन की। कभी झुग्गियों में रहने को ही जिन वनटांगिया महिलाओं और युवतियों ने अपनी नियति मन ली थी, आज उनका जलवा फैशन शो के अनोखे अंदाज में नजर आती है। जनवरी 2022 से अब तक गोरखपुर महोत्सव, आगरा महोत्सव, अयोध्या के सावन झूला महोत्सव, मथुरा, काशी में जी-20 महोत्सव और महाराजगंज महोत्सव में आयोजित फैशन और संस्कृति शो में वनटांगिया महिलाओं ने शानदार प्रतिभा से यह साबित कर दिखाया है कि इस अवसर पर वे किसी से कमतर नहीं हैं. (ये भी पढ़ें- नवरात्रि 2023: गर्भवती महिलाएं किस तरह की नवरात्रि व्रत? आइटमिशियन ने बताए 5 टिप्स)

वनटांगिया महिलाओं और युवतियों को फैशन शो के आदिवासियों की राजधानी रायपुर तक का सफर तय करने के लिए प्रेरित किया गया, जिसका जन्म अप्रवासी राजस्थान में हुआ था। इंटरप्राइजेज की परास्नातक तक की शिक्षा गोरखपुर में ही हुई है और वह वर्तमान में सर्वोच्च न्यायालय के वकील हैं। अनावृत सिंह शेखावत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रयास से कभी-कभी आदिवासियों में जाने वाले वनटांगिया समाज के जीवन में व्यापक बदलाव की मांग की जाती है। उनका कहना है कि फैशन और कल्चरल शो में प्रतिभाग जगाते हुए वह वनटांगिया नारियों को आगे बढ़ा रहे हैं, सीएम योगी की सोच और उनके द्वारा चलाये जा रहे मिशन शक्ति से खुद को जोड़ रही हैं। फैशन शो में कोई बकरी चराती थी, कोई खेती तो कोई सब्जी का काम। उन्हें निःशुल्क अध्ययन कर राजधानी तक ले जाया गया है। दूसरा कभी स्टेज तक नहीं देखा था. आज 17 साल की किशोरी से लेकर 66 साल की उम्र तक के बुजुर्ग तक सम्मान हासिल कर रहे हैं।

वनटांगिया महिलाओं ने अब तक रेबेका भी फैशन शो किया है, वे सभी भारतीय संस्कृति के विषय पर हैं। इस फिल्म की शुरुआत गोरखपुर फेस्टिवल 2022 से हुई जिसमें शो स्टॉपर थे फिल्म अभिनेता व न्यूनतम रविकिशन। फिर तो आगरा महोत्सव, अयोध्या, मथुरा में भी उनके कदम आगे बढ़ते गए। काशी में जी-20 के समारोह में विदेशी मेहमान भी अपने कायल हो गए। सुगम सिंह शेखावत का कहना है कि हर समारोह में लोगों को यह भी जानकारी दी जाती है कि वनटांगिया लोगों की पहली जिंदगी कैसी थी और योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद क्या हुआ। बदलाव आया. (ये भी पढ़ें- स्त्री प्रतिरोध की लेबल अनुगूंज से भरा पूरा एक कविता संग्रह है ‘प्रतिरोध का स्त्री-स्वर’)

बता दें कि दशकों तक देखे गए ही वनटांगियों की पहचान बनी हुई थी। 2017 के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लक्ष्य से उनके जीवन में भी विकास की शुरुआत हुई। घर, बिजली, पानी, चूल्हा, राशन, पेंशन, सड़क, खेत की हकीकत से ऊपर का तारा अब बड़ा सपना देख रहे हैं।

टैग: सीएम योगी आदित्यनाथ, भारत महिला, जीवन शैली



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