उत्तर
आमतौर पर लोग जब बहुत ज्यादा तनाव में रहते हैं या रात को सही से नींद नहीं लेते तो सिर्फ आंखें फाड़ने लगते हैं।
आँख के फड़कने का संबंध दोस्ती से होना सिर्फ विज्ञान से जुड़ा होना कोई वास्ता नहीं है।
आँख फड़कने का कारण: जब भी आपकी बाइक फर्जी होती है तो लोग इसके बारे में आपसे मजाक करने लगते हैं कि आपको कहीं से पता चल रहा है। अगर दांई आंख फाड़ रही है तो लोग कि तरह-तरह की फिल्में बनाते हैं, जबकि बाई आंख फाड़ने पर खर्च होने की संभावना बनती है। यानी दोनों स्थिति में शगुन या अपशगुन की बात होती है। लेकिन ये बातें मिथ के अलावा कुछ और नहीं हैं. इसका विज्ञान से कोई वास्ता नहीं है। विज्ञान में अगर कोई फर्क पड़ता है तो इसे मायोकेमिया (मायोकीमिया) कहा जाता है। सोशल मीडिया पर इस दौर में अक्सर ये आंख दिखाने वाला डराया जाता है कि आंखों में धूल झोंकने वाली एक बहुत बड़ी समस्या होने वाली है, इसलिए हम इसका आकलन करने के लिए मछली आई सेंटर, दिल्ली की आई स्पेशलिस्ट डॉ. ऋचा प्रिये से सच्चाई जानें.
इन वजहों से नज़रअंदाज़ हो सकते हैं
डॉ. ऋचा प्रिये ने बताया कि मायोकेमिया आंखों का फड़कना कोई बहुत बड़ी समस्या नहीं है क्योंकि इसके बारे में गलत धारणाएं फैलाई जाती हैं। उन्होंने कहा कि आम तौर पर लोग जब बहुत ज्यादा तनाव में रहते हैं या रात को सही से नींद नहीं लेते तो सिर्फ आंखें फाड़ने लगते हैं। इसके साथ ही अगर आपने बहुत ज्यादा मात्रा में कैफीन वाली चाय, कॉफी का सबसे ज्यादा सेवन किया है तो भी आंखों का फड़कना आम बात है। आंखों के फड़कने के बाद यह आपका भी सही हो सकता है। इसमें बहुत ज्यादा हैरानी की जरूरत नहीं है. डॉ. ऋचा प्रिये ने बताया कि कम से कम आंखों में इसे लेकर कोई परेशानी नहीं होती।
अन्य कारण जिम्मेदार
डॉ. ऋचा प्रिये ने बताया कि वैसे तो फाकने का कोई कारण नहीं होता लेकिन अगर लगातार फाक रही है तो हो सकता है कि इससे कैल्शियम की कमी हो या शरीर में कुछ और समस्या हो लेकिन यह बहुत ज्यादा किसी चीज की परेशानी के लिए है, ऐसा संभव नहीं है. कम से कम आंखों को कोई नुकसान नहीं होने वाला है। उन्होंने कहा कि शरीर में विटामिन बी 12 की कोई भूमिका नहीं है, न ही यह बहुत खतरनाक है। अगर आपके साथ ऐसा लगातार हो रहा है तो एक बार डॉक्टर से दिखाएं
सोशल मीडिया की जानकारी
सोशल मीडिया के इस दौर में ज्यादातर जगह पर आंख फड़कने की बीमारी से युवाओं को डराया जाता है। यहां तक कि कुछ न्यूज वेबसाइट भी इसे लेकर बहुत गलत जानकारी देते हैं। एक न्यूज वेबसाइट में कहा गया है कि यह बेहद जानलेवा बीमारी है, जबकि एक अन्य वेबसाइट में कहा गया है कि विटामिन बी 12 की कमी से नुकसान होता है। हालाँकि डॉ. ऋचा प्रिये इस तरह के दावे को सिर्फ बकौल कहती हैं। उनका कहना है कि यह बेहद सामान्य बात है जो स्ट्रेस, अधिक मात्रा में कैफीन या कम सोने के कारण होता है। इससे आंखों में किसी प्रकार की बीमारी का उत्तरदायित्व नहीं है। रेयर केस में इसके लिए कुछ अन्य कारण भी हो सकते हैं।
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पहले प्रकाशित : 21 अक्टूबर, 2023, 05:41 IST
