उत्तर
चने की दाल को पीसकर बेसन तैयार किया जाता है.
सत्तू बनाने के लिए चनों को या फिर चने की दाल को भूना जाता है.
बेसन और सत्तू के बीच अंतर: देसी चने का सेवन सेहत के लिए काफी चमत्कारी होता है। ऐसे में स्प्राउट्स से लेकर चने की सब्जी और चने की दाल जैसे अलग-अलग-अलग तरीकों से लोग चने को शामिल करना पसंद करते हैं। वहीं, चने से बेसन और सत्तू भी बनाया जाता है, मगर क्या आप जानते हैं कि एक ही चने से बनने वाले बेसन और सत्तू में क्या अंतर होता है?
बेसन और सत्तू दोनों को ही चने की दाल पीसने के बाद तैयार किया जाता है, मगर इसके बावजूद ना सिर्फ दोनों के स्वाद में अंतर होता है, बल्कि दोनों को खाने का तरीका भी बिल्कुल अलग होता है. आइए हम आपको बताते हैं कि चने से बनने वाले बेसन और सत्तू फाइनल एक-दूसरे से इतने अलग क्यों हैं।
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चने का बेसन बनाने का तरीका
चने का बेसन बनाने के लिए चने की दाल का उपयोग किया जाता है. ऐसे में चने को सुखाने के बाद इसे कूटेकर चने की दाल के रूप में दिया जाता है। जिसके बाद चने की दाल को बिल्कुल नीला पीसकर पाउडर बनाया जाता है। इसी पाउडर को हम बेसन के नाम से जानते हैं। आम तौर पर बेसन से बनी कढ़ी, पकौड़ी, ड्रमी और अन्य प्रकार की मिठाइयाँ बनाई जाती हैं। वहीं रॉ बेसन का कोई खाता नहीं है क्योंकि रॉ बेसन का स्वाद प्रभावित होता है। इसे हमेशा पकाने के बाद ही खाना खाया जाता है।
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सत्तू बनाने का तरीका
चने का सत्तू दो तरह से बनाया जाता है, भुने हुए चने का सत्तू दो तरह से बनाया जाता है. तो वहीं दाल से सत्तू बनाने के लिए चने की दाल को पिसने से पहले इसे सत्तू सा भूना जाता है. जिससे दाल कुरकुरी और स्वादिष्ट भूरे रंग की हो जाती है। ऐसे में भुनी हुई चने की दाल को पीसकर सत्तू तैयार किया जाता है. यही कारण है कि सत्तू को लोग बिना पकाए भी खा लेते हैं। गर्मी के मौसम में लोग कई सत्तू का मसाला या पेस्ट बनाकर खाना पसंद करते हैं। वहीं सत्तू खाने में स्वादिष्ट होने के साथ-साथ पोषक तत्वों से भी भरपूर होता है।
ऐसे समझें बैसन और सत्तू में अंतर
बेसन और सत्तू मूल समय दोनों में उंगली के संकेत के लिए आप एक-एक रंग पर गौर कर सकते हैं। जहां बेसन का रंग परावर्तक पीला होता है। तो वहीं भुनी हुई चने की दाल से बनने के कारण सत्तू का भूरा रंग होता है। इसके अलावा दोनों के स्वाद में भी बेहद अंतर होता है.
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पहले प्रकाशित : 21 अक्टूबर, 2023, 12:36 IST
