अर्थशास्त्र सेजू/बाडमेर। हमारे देश में एक से बढ़कर एक पेड़-पौधे पाए जाते हैं। लेकिन, हमने यह कहावत तो बार-बार कही है कि पेड़-पौधे लगाकर पैसे जरूर कमाए जा सकते हैं। पश्चिम राजस्थान में महोगनी का पेड़ पाया जाता है, जिसके बारे में कहा जाता है कि यह महोगनी का पेड़ है।
जब इंसान किसी काम को करने का निश्चय करता है, तो वह आमतौर पर अपना लक्ष्य पूरा करता है। पश्चिम राजस्थान में महोगनी के पेड़ की ढुलाई निश्चित रूप से दूर की बात नहीं है, क्योंकि यहां के समुद्र तट में पानी की कमी होती है, और यहां इनका तापमान बेहद ऊंचा होता है, इसकी कोई सीमा नहीं होती। आज, हम आपको ऐसे लोगों के बारे में बताते हैं, जो मनोवैज्ञानिक, दार्शनिक, शौक़ीन के साथ-साथ महोगनी के सिद्धांतों को थार के मेरुस्थल में स्थापित करते हैं। इसे आम तौर पर “पैसन का पेड़” के नाम से जाना जाता है, और महोगनी के पेड़ की कीमत 1500 से 2500 रुपये प्रतिघन फुट होती है।
1500 से 2500 रुपये है इसकी कीमत
महोगनी लकड़ी मजबूत और लाभकारी उपयोग के लिए सुनहरी साबित होती है, और यह पानी के प्रति संवेदनशील नहीं होती है। सती दाक्षायनी मंदिर के पुजारी, वासुदेव जोशी, शिष्यों ने महोगनी लकड़ी का उपयोग समुंद्री जहाज, फर्नीचर, टुकड़े, सजावटी सामान, और जैसी वस्तुओं के निर्माण में किया है। महोगनी लकड़ी की कीमत करीब 1500 से 2500 रुपये प्रति घन फुट के भाव तक है.
इन शर्तों में है शर्त
जोशी कहते हैं कि महोगनी के बीज और उपयोग शक्ति औषधियों के निर्माण में होता है। महोगनी के चिकित्सकों का उपयोग कैंसर, कोलेस्ट्रॉल, रक्तचाप, मोटापा और शुगर जैसी कई समस्याओं के इलाज में किया जाता है। इसकी बेकारी का उपयोग खेती-बबड़ी के लिए प्लास्टिक तैयार करना भी होता है। महोगनी के नामांकित तेल का उपयोग साबुन, पेंट, और लाइसेंस उद्योग में किया जाता है।
ये है कीमत
वासुदेव जोशी तैनात है कि, यह पौधा करीब 7-8 फिट का है। उन्होंने यह पौधा फेसबुक पर देखकर 200 रुपये में ऑफ़लाइन कारोबार किया था। सबसे मीठी बात यह है कि यह पौधा सदाबहार होता है और इसकी लंबाई 50 से 60 फीट तक होती है। 12 साल बाद यह पेड़ का रूप धारण कर लेता है, जिसके बाद इसकी बेशकीमती लकड़ी काम में ली जाती है।
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पहले प्रकाशित : 20 अक्टूबर, 2023, 16:01 IST
