उत्तर
हड्डियों की सेहत खराब होने से कई गंभीर नुकसान हो सकते हैं।
गुग्गुल और गिलोय जैसी जड़ी-बूटियों के लिए गुग्गुल और गिलोय की सूची काफी लोकप्रिय है।
मजबूत हड्डियों के लिए जड़ी-बूटियाँ: शरीर की साज-सज्जा के लिए बॉडी की साज-सज्जा की व्यवस्था अत्यंत आवश्यक है। ऐसे में पत्थरों की विशेष देखभाल करनी चाहिए। वास्तव में, कई बार हम अपनी हड्डियों की सेहत को नुकसान पहुंचाते हैं, जिसके परिणामस्वरूप जोड़ों में दर्द, अर्थराइटिस, ऑस्टियोपोरोसिस और हड्डियों से जुड़ी अन्य गंभीर समस्याएं हो जाती हैं। वैसे तो ये परेशानी उम्र बढ़ने की निशानी है, लेकिन कम उम्र के लोगों में भी कम उम्र के लोग इसे देखने की अनदेखी करते हैं। इस तरह के काम करने से भी परेशानी हो सकती है। इससे जुड़े ढांचे को मजबूत बनाने के लिए लोग तरह-तरह के पैमाने भी लेते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए कुछ आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां आपकी मदद कर सकती हैं। इस आयुर्वेदिक औषधि के सेवन से जोड़ों और जोड़ों में दर्द की समस्या भी दूर हो सकती है। अचल संपत्ति लखनऊ के आयुर्वेदाचार्य डॉ. अन्य शर्मा जानिए हड्डियों को मजबूत बनाने वाली 5 जड़ी-बूटियों के बारे में-
5 खास जड़ी बूटियों के लिए हड्डियों की दुकान
गिलोय: साधारण सी दिखने वाली गिलोय स्वास्थ्यवर्धक होती है। आयुर्वेद में इसका उपयोग कई तरह के उपचारों के लिए बड़े पैमाने पर किया जाता है। सुझाव है कि, गिलोय में कॉपर, आयरन, फास्फोरस, कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व होते हैं, जो टुकड़ों को मजबूत बनाए रखने में मदद करते हैं। यह गठिया रोग साबित हो सकता है। इसका सेवन आप साबुत या गिलोय के मिश्रण के रूप में कर सकते हैं।
गुग्गुल: गुग्गल को स्वास्थ्य के लिए अमृत समान माना जाता है। आयुर्वेद में कई गंभीर बीमारियों का इलाज किया जाता है। असल में, गुग्गल शरीर में कैल्शियम की कमी को पूरा करने का काम करता है, जो जोड़ों को सूचीबद्ध करता है। इसमें मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण जोड़ों में दर्द और सूजन की समस्या को दूर करने में मदद कर सकते हैं। साथ ही यह गठिया रोग में भी खतरनाक होता है। आप दूध या पानी के साथ ले सकते हैं।
डेंडिलियन: कई पोषक तत्व से भरपूर डेंडिलियन यानि सिंहपर्णी अवशेषों की सेहत के लिए बेहद प्रभावशाली होते हैं। बता दें कि, डेंडिलियन में मौजूद सिलिकॉन और सिलिकॉन टुकड़ों को बुढापे तक मजबूत बनाए रखने का काम किया जाता है। इसके साथ ही, इन जोड़ों की मरम्मत में भी मदद मिलती है। इसके सेवन से ऑस्टियोपोरोसिस और अर्थराइटिस जैस हड्डियों से जुड़े रोग दूर हो सकते हैं। इसके लिए आप सिंहपर्णी की चाय का सेवन कर सकते हैं।
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गोटू कोला: आयुर्वेद में गोटू कोला का प्रयोग एक शक्तिशाली औषधि के रूप में किया जाता है। इसका उपयोग जोड़ों और मसालों से किया जाता है। असल में, गोटू कोला में कई एंटी-इंफ्लेमेट्री गुण मौजूद होते हैं, जो जोड़ों के दर्द और सूजन से अनिद्रा का कारण बन सकते हैं। इसके नियमित सेवन से वैरिकोज़ वेन्स की समस्या भी दूर हो सकती है। इसके लिए आप गोटू कोला की चाय का सेवन कर सकते हैं।
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लेमनग्रास: लेमनग्रास स्वास्थ्य के लिए वरदान मणि है। आमतौर पर इसका उपयोग चाय के रूप में किया जाता है। बता दें कि, लेमनग्रास में कई ऐसे जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं, जिन्हें हड्डियों को स्वस्थ बनाए रखने का काम किया जाता है। असल में फ्लेवोन ऑक्साइड होता है, जो पत्थरों का विकास और पर्यटन के लिए आवश्यक होता है। ऐसे में लेमनग्रास की चाय के नियमित सेवन से शरीर की इम्युनिटी बूस्ट होती है, जिससे आप कई बार चुटकी में भी आ सकते हैं।
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पहले प्रकाशित : 22 अक्टूबर, 2023, 06:41 IST
