भास्कर ठाकुर/व्युत्पत्ति: रॉयल रॉयल बिहार के बेहद मीठे मिठाइयों में से एक है। अमूमन यह लज़ीज़ मिठाई अब बिहार के अधिकांश आदर्शों में असानी से मिल जाती है, लेकिन स्कूल में मिलने वाला बालूशाही है। शुद्ध घी में बनने वाले इस मिठाई के संस्थापक के लोग दीवाने हैं। अगर आप निजीकरण में हैं और शाही परिवार का स्वाद लेना चाहते हैं तो शहर के कारगिल चौक आना होगा। यहां गौरी शंकर मिष्ठान भंडार का बालूशाही इतना प्रसिद्ध है कि यहां के दुकानदारों की लाइन लग जाती है।
बेहद खस्ता है कारगिल स्क्वायर की बालूशाही मिठाई
विद्वान अरविंद साहा ने बताया कि यहां के बालूशाही की कीमत अन्य जगहों पर थोड़ी ज्यादा रहती है। लेकिन गुणवत्ता इतनी बेहतर है कि लोग भुटही और सैदपुर की मिठाई भूल जाते हैं। यही कारण है कि ग्राहक इस दुकान को सैंडशाही की सबसे ज्यादा पसंद करते हैं। उन्होंने बताया कि प्रतिदिन 80 किलोलीटर दूध की मिठाई बनती है। दूध 50 रूपये किलोलीटर हैं। यहां से लोग बालूशाही के अलवा पेड़ा और बर्फी भी खरीदकर ले जाते हैं। यहां प्रतिदिन लगभग 300 लोग मिठाई और भोजन के लिए आते हैं।
अरविंद ने बताया कि यहां बालूशाही की कीमत 220 रुपये प्रति किलो है, जबकि 10 रुपये में एक टुकड़ा दिया जाता है। उन्होंने बताया कि बाज़ार में भी रेतीले शाही मिलें हैं। लेकिन इस दुकान से रॉयल शाही का स्वाद लोगों को खींचा जाता है। बालाशाही को शुद्ध खोआ से तोड़ दिया गया है। इसमें किसी भी तरह का कोई उत्पाद नहीं रहता है। उसे बताया गया है कि नववर्ष का समय है तो अभी बिक्री बढ़ी है। अवलोकन प्रतिदिन 7 से 8 हजार की कमाई होती है। जबकि आम दिनों में 5 हजार तक की कमाई होती है.
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पहले प्रकाशित : 22 अक्टूबर, 2023, 15:12 IST
