अनूप/कोरबाः सनातन में दशहरे की धूम मची हुई है। लोग दशहरे की जोरो शोरों से स्नातक कर रहे हैं। इस बार 24 अक्टूबर को दशहरा यानी बुराई के प्रतीक रावण का दहन किया जाएगा। हिंदू धर्म शास्त्रों में बताया गया है कि त्रेता युग में आश्विन मास की दशमी तिथि के दिन प्रभु श्रीराम ने लंकापति रावण का वध किया था और माता सीता को उनके वध से छुड़ाया था। तब से हर साल इस दिन को विजयदशमी के रूप में मनाया जाता है और बुराई का प्रतीक रावण जलाया जाता है।
नीलकंठ पक्षी के दर्शन करना शुभ
सिद्धांत है कि श्रीराम को इस पाप से मुक्ति दिलाने के लिए शिव जी ने नीलकंठ पक्षी के रूप में दर्शन दिए थे। भगवान भोले शंकर को उत्तर भारत में नीलकंठ भी कहा जाता है। इसी कारण से नीलकंठ पक्षी को भगवान भोलेनाथ का स्वरूप माना गया है। ऐसे में अगर किसी व्यक्ति को दशहरा के दिन नीलकंठ के दर्शन होते हैं तो यह बेहद शुभ माना जाता है।
नीलकंठ के दर्शन का दोष समाप्त हो गया
पंडित विद्यानंद पैंडे ने बताया कि विजयादशमी के दिन नीलकंठ पक्षी के दर्शन की भावना से व्यक्ति के जीवन में अनेक प्रकार के ग्रह और दोष समाप्त हो जाते हैं। आने वाला पूरे वर्ष व्यक्ति के जीवन में मंगल ही होते हैं। लेकिन इन दिनों ऐसा होना बेहद मुश्किल है क्योंकि यहां कई नीलकंठ पक्षी स्थापत्य देखने को मिल रहे हैं।
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पहले प्रकाशित : 23 अक्टूबर, 2023, 14:52 IST
