ओप/सापानकोरबा : रतनपुर के मां महामाया मंदिर में 52 शक्तिपीठों में से एक पर नवमी तिथि को कन्या पूजन के साथ ही राष्ट्रीय पर्व का समापन होता है। मंदिर परंपरा के अनुसार, इस दिन मां महामाया की राजसी मान्यता है, और लगभग 4 किल सोने के साथ माँ को छोड़ दिया गया है। इस दौरान, भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिली। वहीं मां महामाया के दर्शन के लिए भक्त बड़ी-बड़ी आशाओं से आते हैं।
भैरव बाबा के बिना माँ के दर्शन
रतनपुर के महामाया मंदिर में नवमी तिथि को मां महामाया का राजश्री स्वरूप धारण किया गया, इसके साथ ही लगभग 4 किलों के सोने के आभूषणों से देवी मां का श्रृंगार किया गया है। माता को पूजने के लिए मंदिर प्रबंधन द्वारा विशेष अनुष्ठान भी कराया गया। यहां यह भी बताया गया है कि बिना भैरव बाबा के दर्शन के मां महामाया के दर्शन होते हैं, इसलिए भक्तों को भैरव मंदिर में भैरव सहस्त्रनाम सहित विभिन्न मंत्रों से आहूतियां जुड़ी हुई हैं।
यहां होती है मां सरस्वती की भी पूजा
इस मंदिर का निर्माण 12वें और 13पांचवीं शताब्दी में हुआ था और यह माता रानी के भक्तों के लिए महत्वपूर्ण है। इस मंदिर में होती है मां लक्ष्मी और सरस्वती की पूजा, और कालचुरी शासन काल के दौरान इसका निर्माण हुआ था। राजा रत्न देव ने इस मंदिर में देवी काली के दर्शन किये थे, जिसके बाद लोगों की आस्था से जुड़े हुए हैं ये मंदिर और वो इसमें बड़े श्रद्धा भाव से आए हैं।
.
टैग: छत्तीसगढ़ खबर, कोरबा खबर, स्थानीय18
पहले प्रकाशित : 24 अक्टूबर, 2023, 16:23 IST
