दिल्ली में वायु प्रदूषण: दिल्ली में प्रदूषण ने विकराल रूप अख्तियार कर लिया है। इस लगातार सातवीं दिन भी एयरोस्पेसिबिलिटी ‘खराब श्रेणी’ में बनी हुई है। राजधानी दिल्ली के कुछ देशों में स्थित तो स्थिति इतनी खराब हो गई है कि अगर वहां पर आप एक घंटा भी हिस्सा लेते हैं तो आपको अस्पताल में भी पता चल सकता है। इन इंडोनेशिया में वायु की गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ को भी पार कर गंभीर श्रेणी में पहुंच वाली है। ऐसे में आने वाले कुछ दिन दिल्ली वालों के लिए मुश्किल से होने वाले हैं। मौसम विभाग की राय तो दिल्ली-मैदान में अगले कई दिनों तक हवा की गुणवत्ता में कोई सुधार नहीं हुआ है। सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेडर फोरकास्टिंग एंड रिसर्च (सफर) के अनुसार दिल्ली- कंपनी में एयर की क्वालिटी शुक्रवार को भी खराब श्रेणी में रही। दिल्ली- दिल्ली में एयरोस्पेस स्कैनर (AQI) 250 के आसपास है।
सफ़र के अनुसार गुड़गांव में वायु की गुणवत्ता 252, 208, दिल्ली के लोधी रोड पर 218 दर्ज की गई है। दिल्ली के तीन इलाक़ों में वायु गुणवत्ता बहुत ख़राब श्रेणी यानि 300 को पार कर गयी है। वहीं, सेंट्रल कंट्रोल बोर्ड के मुताबिक शुक्रवार को दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता 250 के पार हो गया। रविवार को 243 और गुरुवार को 256 को यह पार कर लिया गया था. दिल्ली के बवाना, शादीपुर, मुंडका, नेहरू नगर और आनंद विहार में वायु का गुणवत्ता बहुत खराब श्रेणी में पहुंच गई है। इन इलाक़ों में वायु का औसत स्तर 300 के पार है।
पंजाब और हरियाणा में नरसंहार की घटनाएं चरम सीमा पर पहुंच गई हैं। (छवि:पीटीआई)
इन इलाक़ों में हवा ‘बहुत ख़राब’
दिल्ली सरकार ने शुक्रवार से रेडलाइट ऑन गाड़ी ऑफ ड्राइव की शुरुआत की है। बता दें कि एक साल पहले उपराज्यपाल ने इस अभियान पर सवाल उठाए थे। सड़क अनुसंधान संस्थान के अध्ययन से पता चला है कि सिग्नल सिग्नलों पर गाड़ियों के रखरखाव पर प्रदूषण स्तर में 9 प्रतिशत की केंद्रीय वृद्धि हो सकती है। ऐसे में माना जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में इस अभियान का असर दिल्ली में दिख सकता है.
कब तक मिलेगी राहत?
दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति के विश्लेषण के अनुसार 1 नवंबर से 15 नवंबर तक राजधानी में प्रदूषण बहुत अधिक है, जबकि पंजाब और हरियाणा में प्रदूषण की घटनाएं चरम पर हैं। ऐसे में देश की राजधानी दिल्ली में अगले 30 दिनों में प्रदूषण की चुनौती शुरू करने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके तहत बहुत जल्द ही केंद्र सरकार के निर्देशों के तहत यूपी, हरियाणा, पंजाब और दिल्ली सरकार के पर्यावरण परियोजनाओं की बैठक होने वाली है। इस बैठक में प्रदूषण से लेकर एक साझा एक्शन प्लान तैयार किया जाएगा, जिसके तहत दिल्ली, गुड़गांव, ग्रेटर और गाजियाबाद में लागू किया जाएगा।
एक टन पराली में करीब 1,500 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जित होता है।
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बता दें कि एयर क्वालिटी स्टेक 0 और 50 के बीच ‘अच्छा’, 51 और 100 के बीच ‘संतोषजनक’ है। 101 और 200 ‘मध्यम’, 201 और 300 ‘ख़राब’, 301 और 400 ‘बहुत ख़राब’, और 401 और 450 ‘गंभीर’ श्रेणी में माने जाते हैं। दिल्ली सरकार ने 13 स्थानों को शुरू किया है, जहां प्रदूषण से लेकर विशेष रूप से तैयार किए जाएंगे। इसके लिए एक विशेष टीम बनाई गई है, जो प्रदूषण के स्थानीय संसाधनों की पहचान और निरीक्षण करने के साथ-साथ परली को भी ठोस कदम उठाएगी।
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पहले प्रकाशित : 27 अक्टूबर, 2023, 15:31 IST
