उत्तर
हाई इलेक्ट्रानिक का सुपरमार्केट हार्ट अटैक और स्ट्रोक के रूप में आर्कियोलॉजिकल स्टॉक्स मौजूद हैं।
हाई स्कूल से भागने के लिए हर इंसान को चौंकाना बहुत जरूरी है।
उच्च कोलेस्ट्रॉल का शरीर पर बुरा प्रभाव: चॉकलेट एक प्रकार का फैट वेट होता है जो माँ की तरह चिपक जाता है। यह खून के माध्यम से प्रोटीन के साथ शरीर के हर हिस्से तक का अवलोकन है। उदाहरण के लिए, एलोपोप्लाटिन को कहा जाता है। पुराने आर्किटेक्चर सेल्स का निर्माण होता है, इसलिए यह हमारे लिए बेहद जरूरी है लेकिन जब यह ज्यादा होने लगता है तो ब्लड वैसल्स में स्टिक बार जाम होने लगता है। इससे ब्लड वैसल्स जैम होने लगता है और खून का प्रवाह कम होने लगता है। यदि रक्त का प्रवाह कम होता है तो हृदय के शरीर के हर हिस्से तक रक्त का प्रवाह कम होता है। जैसे-जैसे काले खून की नालियाँ या ढामनियों में अधिक मात्रा में जाम लगता है, कष्ट समान रूप से बढ़ता है। कभी-कभी ब्लड वैसल्स में इतना जमा हो जाता है कि ब्लड वैसल्स में फैट हो जाता है या ब्लड वैसल्स में ही क्लॉट होने लगता है। इस स्थिति में हार्ट अटैक या स्ट्रोक आ जाता है।
हाई कोलेस्ट्रॉल से शरीर को नुकसान
मेयो क्लिनिक के अनुसार जब हाई कोलेस्ट्रॉल होता है तो इसका प्रवाह कम हो जाता है। खून का प्रवाह कम से शरीर में पर्याप्त मात्रा में होना ऑक्सीजन की व्यवस्था नहीं है। यहाँ तक कि पोषक तत्त्व भी कम प्रत्यक्ष है। इसका कारण कमजोरी और थकान बढ़ना है। हालाँकि यह बहुत कम होता है इसका पता बहुत बाद में चलता है। हाई क्लासेस में आमतौर पर ब्लड वैसल्स में ही स्टीच सीट दिखाई देती है, जिसके कारण ब्लड वैसल्स और धमनियां खराब हो जाती हैं, जो कि उनके ग्रेट हार्ट अटैक और स्ट्रोके के रूप में रहस्यमयी फोर्टीफाइड हैं। इसलिए हाई ऑलेस्टियल साइलेंट किलर बीमारी कहा जाता है।
चौकन्ना जरूरी
पिछले उच्च होने पर शरीर में बमुश्किल ही लक्षण होते हैं, इसलिए इसे लेकर हमेशा चौकन्ना रहना बहुत जरूरी है। आम तौर पर हाई कोलेस्ट्रॉल जब बहुत बढ़ जाता है और जब इसका इलाज नहीं होता है तो कोलेस्ट्रॉल के जमाव से दिल को खून नहीं मिलता है। इस स्थिति में चेस्ट पेन, हार्ट स्ट्रोक या स्ट्रोक का आना तय हो जाता है। ऐसे में हाई चॉकलेट से बचना के लिए हर इंसान को चौकन्ना रहना बहुत जरूरी है। इस बीमारी का पता सिर्फ खून टेस्ट से ही चल पाता है, इसलिए 25 साल के बाद हर इंसान को एक या दो साल में एक बार लिपिड प्रोफाइल टेस्ट जरूर कराना चाहिए। 60 साल के बाद हर साल लिपिड प्रोफाइल टेस्ट जरूरी है। इसके साथ ही उच्च कोलेस्ट्रॉल से बचाव के लिए वजन पर नियंत्रण रखना होगा। नियमित बेंचमार्क हाई रेलवे से बचाएगा। इसके साथ ही अनहेल्दी पदार्थ जैसे कि स्टोकेर्ड फूड, क्रैचुरी, सेचुर युक्त फ़ाइक, रेड मेट्रिक्स, स्टोकेल्ड फ़ार्म को भी उच्च स्तर पर रखा जाता है। वहीं सिगरेट से भी दूर रहना होगा.
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पहले प्रकाशित : 27 अक्टूबर, 2023, 06:41 IST
