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करवा चौथ 2023: करवा चौथ पर मिट्टी का करवा क्यों होता है खास, पंडित ने बताया ये जरूरी


लक्षेश्वर यादव/जांजगीर चांपा. इस साल सुहागिन महिलाओं का सबसे बड़ा त्योहार करवा चौथ व्रत 01 नवम्बर, रविवार को मनाया जायेगा। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन के लिए निर्जला व्रत रखती हैं और शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत अपनाती हैं। समान लेकर समान यूनिट कर रही हैं और श्रृंगार को लेकर सजने के लिए खरीदारी भी कर रही हैं।

इसके साथ ही करवा चौथ की पूजा के समान भी बाजार में जा रही है। आपको बता दें कि करवा चौथ को लेकर जांजगीर में बाजार में सज गए हैं। करवा चौथ व्रत पूजा में सबसे ज्यादा मिट्टी से बने करवा और छन्नी (चलनी) का महत्व रहता है। करवा को रंग-रोगन से अनबैच किया गया है। वही, छन्नी महिला पूजा के बाद अपने पति को भी पढ़ाती है।

पंडित बसंत महाराज जी ने बताया है कि करवा चौथ के दिन महिलाएं सुबह सूर्योदय से पहले स्नान ध्यान के बाद भगवान की पूजा करती हैं। इसके बाद रात में जब चंद्रमा उदय होने का बादसे करवा (मिट्टी से बने कलश) में कांस के कुछ त्रिन राख रखकर जल और दूध नक्षत्र चंद्रमा को अर्घ्य देने की पूजा की जाती है। उसके बाद व्रत का पारण किया जाता है। पूजा कर लेने के बाद करवा (मिट्टी से बने कलश) में शकर, चावल उपज दान करना चाहिए इससे परिवार समृद्ध रहता है।

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पहले प्रकाशित : 30 अक्टूबर, 2023, 18:47 IST



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