आखिरी बड़कुल/दमोह. दमोह जिले के अधिकांश कारखानों की प्राकृतिक उन्नत लीड वाला यह हरा पत्ता आयुर्वेद में औषधि की खान माना जाता है। स्टोनचट्टा एंटीइन्फ्लेमेटरी गुण से भरपूर है, जो शरीर में कई प्रकार के दर्द को कम करने के लिए औषधि औषधि है। इसके अलावा पेट की पथरी को भी कम करने में मदद मिलती है।
आयुर्वेद (Ayurveda) के अनुसार स्टोनचट्टा में विभिन्न प्रकार के औषधीय गुण पाए जाते हैं और इसका प्रयोग कई प्रकार की उपचारात्मक औषधियों में किया जाता है। स्टोनचट्टा के अलावा इसे एयर प्लांट, कैथेड्रल बेल्स, लाइफ प्लांट और मैजिक लीफ के नाम से जाना जाता है। आयुर्वेद में इस औषधि को भष्मपाठी, पाषाणभेद और पानपुट्टी के नाम से जाना जाता है, जबकि चिकित्सा विज्ञान में ब्रायोफिलम पिनाटम के नाम बताए गए हैं। इस उपकरण के स्वाद में खट्टी और मिठास होती है, जो मुंह के स्वाद को भी बदल देती है।
ऐसे करें सेवन
आयुर्वेद डॉ. अभिषेक खरे ने बताया कि मूत्रवाहिनी में कौन-कौन से रोग होते हैं, इसका उपयोग किया जाता है। स्टोनचट्टा कोटा इंफ़ेक्शन जैसे कि मूत्र नालियो, किडनी में संक्रमण का इलाज के लिए इसका उपयोग किया जा सकता है। किडनी की दवा और भी अन्य दवाओं के लिए यह औषधि पौधा, पथरी से पीड़ित रोगी का खाली पेट भी कर सकते हैं। एक पत्ते को सीधे भी खाया जा सकता है, और बहुत से लोग ऐसे होते हैं जो इसे भजिया भी खाते हैं. इसके अवशेष का सेवन भी किया जा सकता है।
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पहले प्रकाशित : 31 अक्टूबर, 2023, 15:45 IST
