नरेश पारीक/चूरू. अपने भविष्य को लेकर आज का युवा वर्ग काफी चिंता और तनाव में रहता है। वो घातक नतीजे आज हमारे सामने आ रहे हैं और देश की ये भावी पीढ़ी मौत के गले लग रही है। अपने पीछे के दृश्य, बिलखते अपने अवशेषों को हमेशा-हमेशा के लिए अकेले छोड़ रहे हैं। देश के अधिकांश मृतकों के मामले या तो अध्ययन करने वाले वाले मित्र के आ रहे हैं या फिर इतिहास में मिली असफलताओं से निराश युवाओं के, इन्हीं सबके बीच अब सरकार और प्रसाशन नवाचारों के माध्यम से देश की भावी पीढ़ी को तनाव और अवसाद से मुक्ति का प्रयास कर रही है.
पंडित उपाध्याय कैथोलिक मेडिकल कॉलेज के प्रधानाध्यापक डॉ. शशिकांत अग्रवाल कहते हैं कि बच्चों में अक्सर पढ़ाई और माता-पिता का दबाव भी तनाव और अवसाद के कारण बन जाता है। इसके अलावा कॉलेज में सिनियर द्वारा जूनियर स्टोर की रैगिंग भी इसकी एक वजह हो सकती है। शशिकांत अग्रवाल ने कहा कि बच्चों को तनाव मुक्त रखने के लिए हमने 1 फैकल्टी के 10 फैक्ट्री के 15 ग्रुप बनाए हैं, ताकि बच्चे सीधे फैकल्टी से अपनी बात और समस्या शेयर करें और होयर फैकल्टी तक बात आएगी।
सुबह-सुबह योगा और मेडिकल क्लॉज शुरू हो जाएंगे, ताकि बच्चों का कंफर्ट फिल हो जाए और सेसेस्ट्रिक क्लॉज ले जाएं और वह बच्चों को बताएं कि आप कैसे रिलेक्स रिलेक्स की पढ़ाई कर सकते हैं। वर्कशॉप ने कहा कि बीच-बीच में बच्चों को रिलेशन के लिए कल्चरल प्रोग्राम, फ्रेशर पार्टी और डांस क्लॉज रखावते हैं ताकि मेंटली फ्री रह सकें और बीच-बीच में बच्चों को रिलेशन में शामिल करवा सकें।
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पहले प्रकाशित : 1 नवंबर, 2023, 16:38 IST
