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रॉयल हो रहा है चॉकलेट्स का जायका…मावे की नहीं इस मिठाई की है डायनामिक्स


वर्ष 2019 पाठक/अलवर. दशहरे के बाद से ही त्योहारी सीज़न की शुरुआत देश में होती है। दीपावली पर्व आने से पहले लोग अपना मन बना लेते हैं कि उन्हें कौन सी मिठाई खरीदनी है। पिछले दो से तीन सांझ की बात की जाये तो मिठाइयों की मिठाइयों से हटकर मिठाइयों की ओर रुख किया गया है।

इसका कारण यह है कि पिछले कई समय से फेल मावे की याचिका से उत्तर प्रदेश जिले में अपहरण किया जा रहा था। आदिम दर्शन में पहाड़ी इलाकों के निवासियों ने ड्र्राइक्स से बनी हुई मिठाइयों को तरजीह देना शुरू कर दिया। हालाँकि कलाकंद की सजावट आज भी मशहूर है।

वाराणसी शहर के बाजार में लक्ष्मी मिष्ठान भंडार के ओनर हितेश ठाकुर ने बताया कि पिछले दो-तीन वर्षों में पूर्वी शहर बाजार में त्योहारी सीजन को देखते हुए मावे की मिठाइयों से हटकर नकली मिठाइयां से बनी हुई मिठाइयां आई हैं। इसका कारण यह है कि पिछले कई समय से हिमाचल प्रदेश में नकली मावे से बनी चीजों में लगातार पकड़ बनी रहती है, साथ ही नकली मावे से स्वास्थ्य को भी काफी नुकसान होता है।

इस कारण शहर वासियो का रुझान लुक्स की मिठाई की और बढ़ गया है। इसमें काजू कतली, काजू रोल, पिस्ता स्नोकी, बादाम स्नोकी, काजू पाक सहित अन्य मीठा मिश्रण शामिल है। हितेश ठाकुर ने कहा था कि वैसे तो पहाड़ी जिले का कलाकंद विदेश तक मशहूर है, लेकिन कई बार नकली मावे की पकड़ के बाद विश्वनाथ के कलाकंद पर भी असर देखने को मिलता है।

डॉक्युमेंट्स से बनी मिठाई की 700 रुपये है कीमत

हितेश ठाकुर ने बताया कि हालांकि मावे का सामान भी बाजार में बिकता है। लेकिन पहले जैसी बात दो-तीन साल में नहीं रही. मावे से बनी हुई मिठाइयों का भाव 350 रुपए लेकर 450 रुपए तक का रहता है। साथ ही डॉक्युमेंट्स में काजू से बनी मिठाइयों की कीमत 700 रुपये से लेकर 900 रुपये किलो तक है। सीजन में काजू से बनी मिठाई भी लोग सबसे ज्यादा पसंद करते हैं. हितेश ने बताया कि आज भी गुलाब जामिन, बालूशाही, काजू कतली, काजू रोल मिठाइयाँ बड़े पैमाने पर उत्पादों में रहती हैं।

10 दिन पहले शुरू होगी तैयारी

हितेश ठाकुर ने बताया कि त्योहारी सीजन को देखते हुए 10 दिन पहले ही अलवर शहर में मिठाई बनाना शुरू हो गया है। जिसमें कच्चे मावा का प्रदर्शन ही तैयार किया जाता है। उसके बाद में प्याज जाता है जो ज्यादातर दिनों तक खराब नहीं होता। इसके बाद मिठाइयाँ बनाने की शुरुआत हुई।

हितेश ठाकुर ने बताया कि कई लोग मिठाई खरीदकर ले जाते हैं। तो वहीं कुछ लोग अपने सेज एसोसिएटेड और फ्रेंड्स को मिठाई आउटफील्ड प्रोजेक्ट के लिए चार से पांच दिन पहले ही मिठाई की शुरुआत कर देते हैं। मिठाइयों का अच्छा बाज़ार रहता है।

टैग: अलवर समाचार, भोजन 18, स्थानीय18, राजस्थान समाचार



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