Homeदेशजीतन राम दीक्षित ने 'शिक्षक कोर्ट' कहा, जूल की वही ले रही...

जीतन राम दीक्षित ने ‘शिक्षक कोर्ट’ कहा, जूल की वही ले रही नीतीश सरकार, बिहारियों से धोखा हुआ


उत्तर

जीतन राम एटमी ने नीतीश सरकार के खिलाफ़ नेता शिक्षक-शिक्षक अदालत का रुख किया।
समीक्षा में एसोसिएट्स को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास भेजेंगे।
जीतन राम आज़मीत ने कहा कि नीतीश सरकार विपक्ष का काम करेगी.

पटना. हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा सेकुलर पार्टी के संस्थापक संरक्षक सह पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम निष्ठा ने गुरुवार को अपने पटना स्थित आवास पर शिक्षक सांस्कृतिक अदालत का आयोजन किया। 12 एम स्टैंड रोड में हम के संरक्षक जीतन राम व राष्ट्रीय अध्यक्ष सह पूर्व मंत्री बिहार सरकार दा संतोष कुमार सुमन की उपस्थिति में शिक्षक अभ्यार्थी कोर्ट में सैकड़ों अभ्यार्थियों ने भाग लिया। इसमें सभी कलाकारों ने अपनी-अपनी पसंदें बताईं। सभी अध्यापिकाओं की समस्या पर ध्यान दें सुनने के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा गया कि शिक्षक शिक्षिकाओं में बहुत सारी गलतियां पाई गई हैं। बहुत सारे अभ्यार्थी ऐसे आये थे जिनकी सूची में सबसे अधिक संख्या में रहने के बाद भी चयन नहीं हो पाया है। नटखट रोस्टर का पालन नहीं किया गया है.

जीतन केसी जोसेफ ने आरोप लगाते हुए कहा कि उनके आवेदन पत्र की जांच से पहले उनके प्रवेश पत्र को जारी किया जाता है, और यहां पर अभ्यार्थी का अंतिम रूप से चयन होने के बाद पैरवी वाले लोग हैं। एप्लिकेशन सुधार जारी है। यहां आयोग कह रहा है कि एक लाख बीस हजार तीन छत्तीस (120336) अभ्यार्थी सफल हुए थे, जिसमें दस हजार (10000) अभ्यार्थी आरक्षित पाए गए हैं। इधर, सरकार एक लाख बीस हजार तीन सौ छत्तीस(120336) असोसिएशन की सलाह पत्र बाटने की ढिंढोरा पीट रही है। ऐसे में सरकार ने बताया कि ये दस हज़ार (10000) टीचर कहाँ से किस फ़ायदेमंदी से ला रही है?

कोचिंग ने आगे कहा, 120336 इंजील के इंस्टीट्यूट बाहरी राज्य में 18000 हैं, जबकि पहले से कोचिंग की संख्या करीब-करीब 48000 है. मोटी-मोटी 20000 के करीब नए शिक्षक नियुक्त हुए फिर भी सरकार अपना रुख थपथपाते हुए 120336 में सामुदायिक भर्ती की बात कर रही है। यह चित्र बिल्कुल बिहार की जनता के साथ धोखा जैसा है। जबकि, राज्य की सरकार में तीन लाख सात हजार (370000) बिहारियों को सरकारी नौकरी दी गई थी, तब इतने समय की सरकार ढिंढ़ोरा नहीं पिटी थी।

जीतन राम दीक्षित ने 'शिक्षक कोर्ट' कहा, जूल की वही ले रही नीतीश सरकार, बिहारियों से धोखा हुआ

सभी कलाकारों की बातें सुनने के बाद विस्कॉन्सिन ने कहा कि इन सभी मामलों को आयोग और मुख्यमंत्री के पास भेजेंगे और इसे भी पूरा करेंगे। अगर सरकार इन सभी साख का सुधार नहीं करती है तो हमारी पार्टी सड़क से लेकर सदन तक आंदोलन करेगी। आगे आउस्टिट जी ने प्रेस के सामने अपनी निम्न मांगें रखीं (1) एससी/एसटी/ईबीसी/बीसी की तरह बिहार के लोगों को भी लोकप्रियता का लाभ दिया जाए। (2) वैयक्तिक अभ्यार्थी का चयन सामान्य कोटि में चयन की योग्यता रखता है तो और सामान्य कोटी में चयन किया जाए। (3)प्राथमिक विद्यालय (1-5 वर्ग) में रिक्त 3142 पद है जो एससी महिला कोटे का है उन्हें एससी कोटा के पुरुष कोटे से भरा जाए।

इन्होने आगे अपनी चौथी मांग में कहा कि (4) अरबी विषय वर्ग 1 से 5 में 4932 पद रिक्त है जबकि कई लोग कटऑफ से अधिक अंक प्राप्त कर चुके हैं, उनका परिणाम नहीं आया है। (5) असोसिएट्स में बाबासाहब का मेडिकल जांच-पड़ताल ही योगदान दिया जाए। (6) ऐसे कई नाम हैं जिनमें कटऑफ से ज्यादा अंक और क्वालीफाइंग पेपर में भी पास हैं, लेकिन उन्हें शामिल करने का कोई कारण नहीं बताया गया है। उन लोगों को सूचीबद्ध करने का कारण बताया जाए। (7) पीजीटी केमिस्ट्री में 75% रिक्ति के लिए 39 अंक समान वर्ग के लिए निर्धारित थे, जबकि अन्य विषय के लिए 48 अंक निर्धारित थे ऐसा क्यों?

टैग: बिहार के समाचार, बिहार शिक्षक, पूर्व सीएम जीतन राम मांझी, नीतीश सरकार



Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Must Read

spot_img