नई दिल्ली: यूनाइटेड किंगडम बांड योजना पर सुप्रीम कोर्ट में बहस जारी है और रविवार को केंद्र सरकार ने ताले अपनी राखें जारी कर दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट में बहस के दौरान पेट्रोलियम कंपनीज ने यह चेतावनी दी कि बेंचमार्क बांड योजना से पदधारी दल को सबसे ज्यादा फायदा हुआ है। इस पर केंद्र सरकार की ओर से कहा गया कि पशुपालन दल को अधिक योगदान की एक प्रतिपूर्ति है। वहीं सर्वोच्च न्यायालय ने इस बात पर सवाल उठाया कि अस्थायी पार्टी को सबसे अधिक चंदा क्यों दी गई है। इस पर सरकार की ओर से पेश हुए एसजी यी यी के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मुझे कोई अनुमान नहीं लगा लेकिन आंकड़ों में कहा गया है कि जो भी प्लास्टिक दल था, उसमें विश्मिता: अधिक चंदा प्राप्त हुआ है। ये मेरा जवाब है, सरकार का नहीं.
इससे पहले केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि भारत समेत लगभग हर देश में काले धन के इस्तेमाल की समस्या से निपटा जा रहा है और लोनिवि बॉन्ड योजना मतदान प्रक्रिया में ‘अवैध धन’ के खतरे को खत्म करने का एक ‘विवेकपूर्ण प्रयास’ है। . प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की राजधानी, पांच-सदस्यीय संविधान पीठ के समसामयिक केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि शीर्ष अदालत इस विशेष योजना को काले धन की समस्या से लेकर एक एकल प्रयास के रूप में प्राप्त नहीं कर सकती। हो सकता है.
एसजी तुषार मेहता ने डिजिटल भुगतान के खिलाफ वर्ष 2018 और 2021 के बीच 2.38 लाख ‘शेल एसोसिएट’ की कार्रवाई के तहत काला धन से मुक्ति के लिए सरकार द्वारा लाइटहाउस पर कई कदम उठाए। ईसा मसीह, ईसा मसीह, ईसा मसीह, गणतंत्र जे बी पारडीवाला और गणतंत्र मनोज मिश्रा के सलाहकार वाली पीठ के समसामय्य ने कहा, ‘मैं सीधे तौर पर सिद्धांत और राजनीति में और कट्टरता में काले धन का इस्तेमाल करता हूं… हर देश में यह समस्या है से शुरू हो रहा है. रियल मैड्रिड के आधार पर प्रत्येक देश द्वारा देश-विशेषज्ञों से लिया जा रहा है। भारत में भी इस समस्या से जूझना पड़ रहा है।’ पीआरसी राजनीतिक साझीदारी के लिए मौलाना बांड योजना के समर्थकों को चुनौती देने वाली याचिकाएं सुनने में आ रही हैं।
सरकार की ओर से पेश किए गए तुषार मेहता ने कोर्ट में दस्तावेजों में अपने लिखित दस्तावेज़ में कहा, ‘देश की विचारधारा प्रक्रिया में बेहिसाब विमर्श (काला धन) का इस्तेमाल देश के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है।’ डिजिटलीकरण की भूमिका का उल्लेख करते हुए, मेहता ने कहा कि भारत में लगभग 75 करोड़ मोबाइल इंटरनेट उपयोगकर्ता हैं और हर तीन सेकंड में एक नया इंटरनेट उपयोगकर्ता जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि भारत में डिजिटल भुगतान की मात्रा अमेरिका और यूरोप की तुलना में लगभग सात गुना और चीन की तुलना में तीन गुना है। फेथ ने कहा कि कई प्रतिभाओं के कारण काले धन के खतरे से प्रभावी ढंग से नहीं रोका जा सका है, इसलिए वर्तमान योजना प्रणाली और चुनाव में सफेद धन को सुनिश्चित करने का एक विवेकपूर्ण और श्रमसाध्य प्रयास है।
तुषार मेहता ने अदालत में अपने लिखित दस्तावेज़ में कहा कि बेहिसाब विमर्श (काला धन) का इस्तेमाल करने वाले देश की विधर्म प्रक्रिया को गंभीर चिंता का विषय बना दिया गया है। उन्होंने कहा, ”सत्तारूढ़ दल को अधिक योगदान की प्राप्ति एक प्रतिपति है।” इस पर प्रधान न्यायाधीश देवी चंद्रचूड़ ने पूछा कि आपके लिए, ऐसा क्यों है कि अस्थायी दल को चंदे का एक बड़ा हिस्सा कहा जाता है, इसका कारण क्या है। फेथ ने फेसबुक पर शेयर किए गए फेसबुक अकाउंट में कहा है कि जो भी उनकी पार्टी में है, वह उनका व्यक्तिगत जवाब है, सरकार का जवाब नहीं है।
जब पीठ ने पार्टिकल गोपनीयता का खुलासा किया और कहा कि सत्य में बैठे व्यक्ति के पास विवरण तक पहुंच हो सकती है, तो सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि जानकारी पूरी तरह से विश्वसनीय है। पृष्णि ने कहा कि यह एक अज्ञात क्षेत्र है। आप ऐसा कह सकते हैं, दूसरा पक्ष इससे सहमत नहीं होगा। दिन भर चली सुनवाई के दौरान एक हस्तक्षेपकर्ता की ओर से पेश किए गए वयोवृद्ध वकील विजय हंसारिया ने तर्क दिया कि स्वतंत्र और उच्च स्तरीय चुनावी संविधान की दार्शनिक संरचना और राजनीतिक समन्वय की ‘कॉर्पोरेट फ़ंडिंग’ है, जो अनिवार्य रूप से निर्धारित की गई है , सरकार की डेमोक्रेटिक आउटलेट की जड़ पर प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि मैनचेस्टर बॉन्ड लिमिटेड एसोसिएटेड फाइनेंसिंग का एक साधन है जो कंपनी को मजबूत बनाता है और अपारदर्शिता को बढ़ावा देता है।
सुनवाई के दौरान सीजेआई चंद्रचूड़ ने एक अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर आप वास्तव में उस योजना को लागू करना चाहते हैं और समान अवसर चाहते हैं तो ये सभी चंदे भारत के चुनाव आयोग को दिया जाना चाहिए, जिसमें बाद में न्यायसंगत आधार पर कहा जाए। . सीजे ने आगे कहा कि इस योजना से प्रतिशोध को टाला नहीं जा सकता। अब निर्माता कंपनी अधिनियम के तहत किसी भी कंपनी को यह खुलासा करने की जरूरत नहीं है कि वह किस राजनीतिक दल को योगदान दे रही है, लेकिन उसे यह दिखाना होगा कि वह कितना योगदान दे रही है। अगर एक कंपनी का कहना है कि मैंने इस वित्त वर्ष में 400 करोड़ का योगदान दिया है. अब सत्य में रहने वाली पार्टी को पता है कि उस कंपनी के पोर्टफोलियो बांड के रूप में कितना पैसा आया है। इस पर एसजी मेहता ने कहा कि यह कभी पता नहीं चल पाएगा तो सीजे ने कहा कि नहीं, पार्टी पूरी तरह से प्रमाणित है।
वहीं, जस्टिस खन्ना ने कहा, ‘कंपनी अधिनियम के तहत वास्तविक आय का पता लगाने के उद्देश्य से रखे गए हैं। ये लागत मूल्य निर्धारण अलग-अलग होते हैं। आम तौर पर कंपनी अधिनियम के तहत, मुनाफ़ा को बढ़ा-चढ़ाकर बताया जाता है, क्योंकि तब आपको बाजार में अधिक छूट और ऋण तक अधिक पहुंच होती है।’ उन्होंने कहा कि इसके विपरीत अर्थशास्त्र अधिनियम में अस्तित्व की संभावना है। एक इंटरवेंशन एक्टर की ओर से पेश किए गए प्रमुख कलाकार संजय हेगड़े ने भी दिन के दौरान अपनी दलीलें तय कीं। उन्होंने कहा कि डेमोक्रेट बांड चुनाव विशिष्ट हैं। इस पर पृपिन ने कहा, यह जरूरी नहीं है। इसमें कहा गया है कि बांड वर्ष में कुछ निश्चित समय पर और फिर आम चुनाव से कुछ दिन पहले नतीजे निकाले गये थे।

इस योजना को सरकार द्वारा 2 जनवरी, 2018 को अधिसूचित किया गया था। योजना के अनुसार, अर्थशास्त्री बांड भारत के कोई भी नागरिक या देश में इकाई स्थापित कर सकता है। कोई भी व्यक्ति अकेले या अन्य लोगों के साथ संयुक्त रूप से स्टॉक एक्सचेंज खरीद सकता है। जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29ए के तहत पंजीकृत ऐसे राजनीतिक दल, एकल या राज्य विधानसभा के पिछले चुनाव में कम से कम एक प्रतिशत वोट प्राप्त करने के पात्र हैं। अधिसूचना के अनुसार, डेमोक्रेट बॉन्ड को किसी भी पात्र राजनीतिक दल द्वारा केवल अधिकृत बैंक के माध्यम से शामिल किया जाएगा। (इनपुट भाषा से)
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पहले प्रकाशित : 2 नवंबर, 2023, 08:58 IST
