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पेरेंटिंग टिप्स: पिता की कही ये 5 बातें, बच्चों को बताती हैं समझदारी, जिंदगी पर पड़ता है गहरा असर, आपने क्या बताया?


उत्तर

एक पिता ने अपनी सहमति जताई तो बच्चे को भी ये बातें सिखाई गईं।
बच्चों को बताया जाता है कि कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता।

पालन-पोषण युक्तियाँ: बच्चों को एक अच्छा इंसान बनने की प्रेरणा उनके माता-पिता से ही सबसे पहले मिलती है। माता-पिता जो करते हैं, जैसे होते हैं, व्यवहार करने वाले में एक-दूसरे के साथ अपनाते हैं, वही बातें बचपन से बच्चे भी देखते हैं, सिखाते हैं और पढ़ते हैं। आगे वे भी अपने माता-पिता की तरह ही मौजूद हैं। विशेषकर बच्चों के जीवन पर पिता का सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है, क्योंकि बच्चे पर पिता का अधिक प्रभाव पड़ता है। वे अपने रोल मॉडल मॉडल हैं. अपने ससुराल वालों को बच्चे ही अपने हीरो समझाते हैं। ऐसे में एक पिता की पूरी तरह से जिम्मेदार विशेषताएं हैं कि वे भी मां की तरह अपने बच्चों की तरफ ध्यान दें। उन्हें अच्छी बातें सिखाएं, बुरी आदतें दूर रहने के लिए कहें। अच्छे-बुरे में बातें करना. ऐसे में पिता को अपने बच्चों को कुछ बातें जरूर बतानी-समझनी चाहिए, जो बच्चे के जीवन में खास प्रभाव छोड़ें। उन्हें एक नेक इंसान बनाया. तो जानें पिता को कौन-कौन सी बातें अपने बच्चों को जरूर सिखानी चाहिए।

पिता ने जरूर सिखाई, अपने बच्चों को बताई ये बातें

1. वोट का करें सम्मान- किसी भी व्यक्ति का सम्मान करना एक अच्छी आदत है। अगर आप खिलाड़ियों का सम्मान करते हैं तो अपने बच्चों से भी ऐसा करने के लिए कहें। साथ ही उन्हें ये भी कहते हैं कि किसी भी इंसान का सम्मान करना, उनके साथ जैसा पेशी में आना कोई छोटा नहीं होता है। आप सामने वाले की बातों की कद्र करेंगे, उसे सम्मान देंगे तो वह भी आपको उतना ही महत्व देगा। सम्मान की भावना आपके अंदर नहीं होगी तो कोई भी आपकी कद्र नहीं करेगा।

2. ग़लत को स्वीकार करना सिखाना- हमेशा अपने बच्चों को एक्सेप्ट करना सिखाएं। कुछ लोग गलती करने के बाद भी जिद पर अड़े रहते हैं कि उन्होंने कुछ नहीं किया है और टॉल्स्टैक्स से ग्लिसरॉल्ट्स हैं। यदि आप भी घर के मुखिया को कोई गलत कर देते हैं तो उसे स्वीकार करें। आपने ये खूबसूरत बच्चा देखा तो वो भी अपनी गलती को मान लीजिए। आप अपनी गलती के लिए मांफी मांगते हैं तो बच्चा भी ऐसा जरूर करेगा।

3. हार को ग़लत ना बूटा- अक्सर बच्चे किसी भी प्रतियोगिता में हार कर रोते हैं। हार जाने को गलत या बुरा माना जाता है। धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे हो रही बच्ची हरेन के डर से कॉम्पिटिशन में हिस्सा लेने से कतराना लगता है। एक पिता के होने के नाते अपने बच्चों को समझाते हैं कि हारना में कोई बैरी नहीं है। एक कॉम्पिटिशन में हार जाने या कम रैंक आने से जीवन समाप्त नहीं होता है। आगे कई लक्ष्य ऐसे आते हैं, जहां मेहनत और लगातार प्रयास से भी जीत हासिल की जा सकती है। ऐसे में बच्चों को मेहनत करने के लिए प्रेरित करते रहें।

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4. प्यार जटाना सिखाएं- यदि एक पिता के साथ प्यार से पेशी आ जाए, तो एक पिता को प्यार बाँटे तो बच्चों में भी ये आदत विकसित हो जाती है। अगर पिता ही कड़क, गुस्से में होंगे तो बच्चा भी इस आदत को अपनाएगा और किसी से प्यार से पेश नहीं आएगा। हमेशा लेखों से खिज़कर, अंतिम संस्कार में बात करेंगे। अगर आप किसी की बेइज्जती करते हैं, किसी की बेइज्जती करते हैं तो ये जताना भी जरूरी है, फिर बेइन्तहा रिश्ता कोई भी क्यों ना हो।

5. काम कोई छोटा-बड़ा नहीं होता- घर के मुखिया के रिश्तेदार अगर आपका काम बड़ा और बेहतर हो तो घर का काम छोटा हो तो बच्चा भी ऐसा ही होता है। घर के काम-काज नहीं, सिर्फ लड़कियों को ही ऐसी बातें करनी चाहिए जो बच्चों के सामने देखने से भी बचना चाहिए। आपके बच्चे को बताया गया है कि कोई भी काम छोटा-बड़ा नहीं होता है। घर का काम हो या बाहर का, बेटा-बेटी को नौकरी दिलानी चाहिए।

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