अनंत कुमार/गुमला. धुस्का छोले झारखंड का पारंपरिक खाना है। सुबह-सुबह शायद कोई ऐसा स्टॉल व ठेला हो, जहां आपको एक्सटेंडेशन के रूप में गरमा गरम धुसका ना मिले। यह देखने में अजीब लाजवाब है इसका स्वाद भी शान ही स्वादिष्ट है। खास तौर पर त्योहारों में इस व्यंजन को खासतौर पर बनाया जाता है, लेकिन अगर आप गुमला में रहते हैं तो एक बार आपको जिले का सबसे पुराना धुस्का स्टॉल फंटूश चाट भंडार में धुस्का स्ट्रेंथ कर सकते हैं।
दुकानदार मुकेश कुमार वर्मा ने बताया कि हमारा स्टॉल गुमला जिले का सबसे पुराना धुस्का ठेले के रूप में जाना जाता है। इस स्टॉल की शुरुआत मेरे प्रतिष्ठित गणेश राम से लगभग 40 साल पहले हुई थी। उस समय 1 रुपए में 8 पीस धुसाका एवं छोले की सब्जी दी गई थी। फसल वृद्धि के कारण वर्तमान में 15 रुपए जोड़े दिया जाता है और साथ में चना आलू की सब्जी और छोला दिया जाता है।
40 साल से घोषित है धुस्का का स्वाद
मुकेश वर्मा ने बताया कि हमारे यहां बना धुस्का का स्वाद लोगों को बहुत पसंद आता है. यही वजह है कि 40 साल के करीब हो जाने के बाद भी हमारे स्टॉल में सपनों का तांता लगा रहता है। हमारे यहां लगभग 15 से 20 राइड चावल और 5 से 6 राइड उड़द दाल की छुट्टियाँ प्रतिदिन मिलती हैं और यह स्टॉल पूरे जिले में धुस्का के लिए प्रसिद्ध है, काफी दूर-दूर से लोग हमारे यहां धुस्का का स्वाद चखने आते हैं। धुस्का बनाने के लिए शुद्ध तेल का उपयोग किया जाता है। इसके अलावा छोले में घर का पिसा हुआ मसाला डाला जाता है। इसका स्वाद बड़ा पारंपरिक है।
15 किमी दूर से आते हैं धुस्का का स्वाद
उन्होंने कहा कि हमारी स्टॉल दोपहर 2:00 बजे से लेकर रात 8:00 बजे तक खुली रहती है। धुस्का के अलावा हमारे यहां स्पेशल चार्ट, समोसा, इडली, कचरी, प्याजी, आलू चाप उपलब्ध है। वहीं, दुकान पर आए ग्राहक वरुण कुमार ने बताया कि मेरा घर यहां से करीब 15 किलोमीटर दूर है। 100 रुपये का पेट्रोल भी जलता है. लेकिन यहां के स्वाद के कारण मैं यहां 6-7 साल से नियमित रूप से धुस्का खा रहा हूं। यहां के धुस्के का जो टेस्ट है वो बहुत ही लाजवाब है। मैंने झारखंड के कई आशिकों में धुस्का खाया है, लेकिन यहां जैसा स्वाद कहीं नहीं मिलता।
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पहले प्रकाशित : 5 नवंबर, 2023, 10:20 IST
