उत्तर
वायु प्रदूषण के कारण हार्ट अटैक, डायरिया, अस्थमा के नुकसान की बढ़ोतरी बढ़ रही है।
विशेषज्ञ का निष्कर्ष तो अभी कुछ दिन के प्रदूषण से राहत मिलने का साथी नहीं है।
दिल्ली वायु प्रदूषण के दुष्प्रभाव: फिलाफ-प्रोफेसर में पॉल्यूशन कम होने की बजाय बढ़ रही है। पंजाब की पराली का स्मोक हो या फिलाफी में हवा की सबसे सस्ती दोनों चीजें ही एयर पॉल्यूशन को कम नहीं होने दे रही हैं। मौसम विभाग की राय तो आने वाले दिनों में अभी भी प्रदूषण से राहत नहीं मिलने वाली। उत्तर प्रदूषण इसकी वजह से कई गंभीर बेरोजगारी का खतरा बढ़ रहा है। फ़्लोरिडा ही नहीं, ग़ाज़ियाबाद, ग़ाज़ियाबाद और गुड़गांव के अस्पतालों में गिरफ़्तारी की रफ़्तार तेजी से बढ़ी है।
नेशनल इन्सर्टाइयूट ऑफ़ ट्यूबरकम्पोलोसिस एंड रेस्पिरेटरी डिजीज पल्मोनरी मेडिसिन विभाग में प्रोफेसर डॉ. संजय गुप्ता कहते हैं कि दार्शनिक में प्रदूषण ग्रोथ के बाद हॉस्पिटलों में रेस्पिरेटरी डिजीज वाले की रिकवरी में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। प्लांट में चलने वाले एलर्जी ट्रैक्टलिनिक में ही सामान से कई गुना मरीज पहुंच रहे हैं। नावतार मामले अवैज्ञानिक वैज्ञानिक के आ रहे हैं. जहां कुछ ऐसे रोगी भी हैं, वहीं कुछ ऐसे रोगी भी हैं, जहां उनकी अस्थायित्मा के लक्षण अचानक से बढ़ गए हैं और उनमें सीवियरिटी आ रही है।
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अपोलो, एआर आर्किटेक्चर और ऑल इंडिया इंटीग्रेटेड इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज की दृष्टि में केवल सांस, दम या लंगड़ा की प्रतिभा के खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि हार्ट अटैक या आर्किटेक्चर ऑफ मेडिकल साइंसेज की प्रतिभा की संभावनाएं भी बढ़ गई हैं।
सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट के पॉल्यूशन कंट्रोल यूनिट में विशेषज्ञ विवेक चट्टोपाध्याय एक अनुमान के मुताबिक, पॉल्यूशन के बाद अध्यापिकाओं में 30 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। ये सभी मिलिजुली बैस्ट के प्रतिभागी हैं। ऐसा माना जा सकता है कि प्रदूषण के शरीर पर असर के बाद मधेश्या अस्थिरता के लक्षण भी तेजी से उभर रहे हैं।
कुछ दिन बर्बाद हो गए
विवेक चट्टोपाध्याय का कहना है कि समुद्र में हवा 4 से 8 किमी प्रति घंटे की दूरी तक फैली हुई है, जबकि तरल पदार्थों से लेकर ठोस गैसों तक एक जगह से दूर तक फैली हुई है। इसकी वजह से प्रदूषण एक जगह बन गया है और बढ़ रहा है। इस समय यह बेहतर होगा कि जिन लोगों को शांति, अपवित्रता, अस्पताल संबंधी या नियोक्ता को कोई गंभीर बीमारी हो, वे कुछ दिन के लिए संभव हो सकें तो यहां की हवा से बाहर निकल जाएं।
जिस दिन के लिए छुट्टी मिलनी चाहिए- मित्र
विवेक कहते हैं कि सभी के लिए बस की बात नहीं है, लेकिन जो लोग एफ़ोर्ड कर सकते हैं, या जो स्पिरिट्यूड-साहित्यिक प्रयोगशालाओं से जुड़ सकते हैं, वे कम से कम 20 दिन के लिए सहयोगियों को छोड़ देते हैं, तो बेहतर होगा . हालाँकि तब तक प्रदूषण साफ़ करना ज़रूरी नहीं है लेकिन कुछ राहत मिल सकती है। वहीं अगर वे शहर नहीं छोड़ सकते तो तीन दिन घर के अंदर रह सकते हैं, बाहरी वैज्ञानिक साइंटिस्ट कम कर दे सकते हैं। बाहर निकलें तो एन-95 मास्क व्यवसाय ही निकलें।
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पहले प्रकाशित : 7 नवंबर, 2023, 20:50 IST
