कृष्ण कुमार/नागौर. राजस्थान में हर जगह भोगोलिक विविधता है जिसके अनुसार थोड़ा बहुत खाना भी खाया जाता है। पश्चिमी राजस्थान में आमतौर पर चार प्रकार की पकाई जाती है या घर में पकाई जाती है। जी हां पश्चिमी राजस्थान में कुछ सजावटी सब्जियां होती हैं। यहां बारिश के समय में एक सब्जी की खेती भी होती है जिसमें एक सब्जी बेल आधारित और तीन सिद्धांत वाले पेड़ लगते हैं। यू कहें कि यह पेड़ के फल से बनी सुखकर या पेड़ से बनी सब्जी है।
असल में, बारिश के मौसम में खेतों में फसल के साथ-साथ कचरा की भी खेती होती है, इसलिए सब्जी बनाना काम में आता है। उसी प्रकार खेजड़ी के पेड़ से साग्री, गुंडे के पेड़ से गुंडा व कैरे के पेड़ से कैरे को मिठाई की सब्जी बनाई जाती है। सब्ज़ियो की ख़ास बात यह है कि इन सुखकर आने वाले दिनों में भी सब्जी ख़रीदा जा सकता है। यह रासायनिक स्वास्थ्य के लिए भी जरूरी नहीं है। इनमें से एक सेवन से प्रतिरक्षा तंत्र भी मजबूत होता है।
100 से 1800 रुपए किलो कीमत
बिजनेसमैन अरुण मोथा कुमार ने लिखा है कि यह पिछले 20 साल से काम कर रहा है। किसानों ने बताया कि किसानों से यह सिद्धांत मिलता है। इन हॉलवे के भावो की बात करें तो कचेरी 100 रुपये से लेकर 120 रुपये प्रतिकिलो, कैर की बात करें तो 1500 से 1800 रुपये और साधारण कैर की बात करें तो 800 से 1000 रुपये, सगरी 800 रुपये किलो और सूखा गुंडा 500 रुपये किलो तक है . उन्होंने बताया कि साग्री लंबे समय तक खराब नहीं होती। वहीं, कैर में वास्तव में बहुत जीव लग जाता है अगर कैर को समय-समय पर धूप देते रहे तो बुरा नहीं होता है। वहीं, कचेरी के बारिश के मौसम में जब तक रंग नहीं बदलता तब तक स्वाद में कमी नहीं आती। गुडा को समय-समय पर धूप देना आवश्यक है।
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पहले प्रकाशित : 7 नवंबर, 2023, 15:41 IST
