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किशोरावस्था को झटककर दूर भगाता है प्याज, विटामिन-मिनरल की खान, कई सामानों की बिक्री


प्याज जीवाणुरोधी और सूजन-रोधी: प्याज के दाम आज घट-बढ़ रहे हैं और लोगों को लगता है कि कुछ दिन से इसका सेवन किया जाए। ये तो आपकी पसंद है, लेकिन प्याज जैसी सब्जी है जो बिना रसोई का ‘स्वाद’ अधूरा-अधूरा सा रहेगा. वह इसलिए कि भोजन में प्याज का स्वाद तो भरा हुआ है, साथ ही अपने असीमित अनुपात के कारण शरीर को कई मंजिलों से बचाया जाता है। बुढ़ापे को दूर रखने (एंटी एजिंग) का गुण तो है ही, साथ ही यह दिल को तंदुरुस्त बनाता है और पेट के लिए भी है। पेज में ‘जवान’ बनाए रखने की भी अद्भुत क्षमता है। खाद्य पदार्थों को प्याज रोगाणुरोधी, बैक्टीरिया प्रतिरोधी और सूजन-रोधी भी माना जाता है। आयर्वुड (प्याज पर आयुर्वेद) और ग्रीक चिकित्सा पद्धति भी प्याज के बारे में खास बताया गया है।

प्याज में कैल्शियम, आयरन, प्रोटीन क्या नहीं है!

ट्रिपल प्याज में एक ऐसी खासियत है, जिसके दाम हर साल बढ़ते हैं और जब इसकी आवक बढ़ती है तो ट्रिपल में भारी कमी आ जाती है। जो लोग प्याज के मसालों से जुड़े होते हैं, वे हर मौसम में इसका सेवन करते हैं। लेखक एवं भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. बिश्वजीत चौधरी ने अपनी पुस्तक ‘वेजिटेबल्स’ में बताया है कि इसे सब्जी के स्वाद के अलावा आलू बनाने के लिए भी उपयोग में लाया जाता है, साथ ही इसे पकाने या पकाने में भी आसानी से खाया और खाया जा सकता है। चौधरी के अनुसार प्याज में फैट न के बराबर होता है तो इसमें फास्फोरस, विटामिन ए, विटामिन सी, प्रोटीन, के अलावा कैल्शियम और आयरन भी पाया जाता है। उनका कहना है कि प्याज के पोषक मूल्य में अलग-अलग स्टॉक का हिसाब-किताब अलग-अलग होता है।

इस्लामिक देशों में सबसे ज्यादा क्यों होता है प्याज!

इस्लामिक देशों में प्याज़ की सबसे अधिक मनी पाई जाती है। उसका कारण यह है कि पेज में बुढापे के समय को दूर रखने की क्षमता है। यह पेट के लिए भी बहुत जरूरी है और पाचन तंत्र को सटीक माप देता है। बता दें कि जब भी भारत में प्याज की कमी होती है तो उसे पाकिस्तान और अफगानिस्तान से मंगाया जाता है। रेबेय भी मुगलई व्यंजन हैं, विशेष रूप से मांसाहारी, उनमें प्याज का उपयोग अधिक किया जाता है, क्योंकि यह भारी भोजन भी हजम करने में मदद करता है। पंजाबी भोजन में भी प्याज़ का प्रयोग किया जाता है, क्योंकि यह रिकॉर्डिंग से मुक्त है।

तीन हजार साल पहले बंद किए गए भारतीय आयुर्वेदिक ग्रंथ ‘चरकसंहिता’ में प्याज (पलाडुं) के गुण का वर्णन किया गया है और बताया गया है कि प्याज कफ और वायुनाशक है। यह शरीर में बल पैदा होता है। यह वैश्यकारी (सीमेन व सेक्सपावर बढ़ाने वाली) भी है। तो आप समझ गए होंगे कि प्याज का आख़िर इतना अधिक उपयोग क्यों किया जाता है। प्याज के और गुणवत्ता के बारे में भी आपको जानकारी दी गई है।

1. चार्चचार्ता व होमशेफ सिम्मी बब्बर ने कहा गया है कि प्याज पर कई शोध किए गए हैं और कुछ शोध में इसे चमत्कारिक ढंग से भी बताया गया है। इसमें फ्लेवोनोइड्स (सूजन रेज़िड) और स्ट्रेचोसल्फर (बैक्टीरियल और हाई बीपी रोधी) अवायव पाए जाते हैं जो हार्ट रोग को दूर रखने में मदद करते हैं, साथ ही हाई बीपी को भी कंट्रोल में रखने में भूमिका निभाते हैं। ऐसा भी माना जाता है कि प्याज के छिलके को पतला करने से मदद मिलती है, जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा कम हो जाता है।

2. एक रिसर्च में यह भी दी गई जानकारी से पता चलता है कि प्याज के आर्क रक्त में ग्लूकोज के स्तर को भी कम बनाए रखने में मदद मिलती है। उसका कारण यह है कि इसमें मौजूद ग्लूकोज़ सांद्रण माना जाता है। अब अगर प्याज के अर्क की बात कर रहे हैं तो आम आदमी में है कि अगर कान में दर्द से राहत नहीं मिल रही है तो प्याज के अर्क कान में डालने से दर्द से तुरंत राहत मिल सकती है। पेज के आर्क को अगर त्वचा पर लगाया जाए तो मुरझाई हुई चमकदार चमक होगी और कसावट भी पैदा होगी। इसके रस को अगर बाल पर इस्तेमाल किया जाए तो वह बंद हो जाएगा, साथ ही जून से भी उपकरण मिल जाएगा।

3.प्याज का सेवन डार्ट्ज बेहतर निर्माणों के साथ मदद करता है और इकाइयों को भी मजबूत बनाए रखता है। प्याज में इनुलिन (विशेष प्रकार का कच्चा) पाया जाता है जो कि बेहद फायदेमंद होता है। उसका लाभ यह होता है कि पेट दर्द और पेट की कीड़ों से भी मुक्ति बनी रहेगी। अध्ययन में यह भी लिखा गया है कि प्याज में ऑस्टियोपोरोसिस (हड्डियों की कमजोरी) को रोकने के भी गुण पाए जाते हैं। यह गठिया और जोड़ों की सूजन से भी मुक्ति दिलाता है। ऐसा भी माना जाता है कि प्याज का नियमित सेवन साइनस से लेना है।

4. प्याज में शरीर को रोगाणुरोधी, जीवाणुरोधी और सूजन-रोधी बनाए रखने के गुण होते हैं, इसे शरीर के लिए सर्वगुण मूल्यवान माना जाता है। प्याज में सेलेनियम (विशेष प्रकार का एंटीऑक्सीडेंट) होता है जो शरीर की रासायनिक क्षमता को सामान्य बूस्ट से बचाए रखता है। यह इम्यून सिस्टम को भी बढ़ाता है अहम रोल अदा करता है और बेड क्लास को दूर रखता है। ऐसा भी माना जाता है कि जिन लोगों को सांस संबंधी समस्या है, वह अपने भोजन में प्याज नियमित रूप से लें तो उन्हें राहत मिल सकती है। तो आप समझ गये न. पेज के मसालों को लेकर झंझट में न पड़ें, तामसिक ही सही, लेकिन कच्चे-पक्के रूप में अगर इसे अपने भोजन में शामिल कर लें तो शरीर और मन सानंद रहेगा।

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