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‘केरल सरकार मुझे अंधेरे में रख रही है’, गवर्नर खान का आरोप- विधायिका का गलत इस्तेमाल हो रहा है


तिरुवनंतपुरम. केरल (केरल) के गवर्नर आरिफ मोहम्मद खान (आरिफ मोहम्मद खान) ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार विद्यालय का उपयोग अपने शैक्षणिक संस्थानों से लेकर अन्य छात्रों के लिए कर रही है और उन्हें विभिन्न छात्रों पर अंधेरे में रख रही है। सुप्रीम कोर्ट (सुप्रीम कोर्ट) ने हाल ही में टिप्पणी की थी कि राज्य सरकार और राज्यपाल को आपसी तालमेल से काम करना चाहिए। इस पर सलमान ने पूछा कि खान ने टिप्पणी की ‘निश्चित तौर पर उनके बारे में ऐसा करना चाहिए।’

उन्होंने साथ ही सवाल किया कि जब उन्हें अंधेरे में रखा जाता है तो क्या किया जाता है या ‘जब विधायिका का उपयोग उनके निर्धारित कार्यों से इसके उद्देश्य के लिए किया जाता है।’ गवर्नर ने कहा, ‘जब आप शुरुआत से ही विधायिका का उपयोग अपने निर्धारित कार्य से इस उद्देश्य के लिए करने लगते हैं, तो आप गवर्नर को अंधेरे में रख देते हैं, आप अपने न्यायाधिकार क्षेत्र से परे के कानून को पारित कर देते हैं। तब क्या किया जाये? जब आप चाहते हैं कि मैं किसी ऐसे मामले में अपनी सहमति दूं जो निश्चित रूप से उसके न्यायाधिकार से बाहर हो, तब क्या किया जाए?

सर्वोच्च न्यायालय ने जो कहा है, उसे सभी को सम्मान देना चाहिए
खान ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने जो कहा है, उसका सम्मान किया जाना चाहिए और उसका समर्थन किया जाना चाहिए, लेकिन यह जजमेंट के रूप में होना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘मैं उनके द्वारा कहे गए कुछ कथनों पर टिप्पणी नहीं करूंगा क्योंकि मामला दूसरा है।’ यहां जजमेंट पर टिप्पणी का सवाल नहीं है. सुप्रीम कोर्ट जो भी फैसला करे उसे लागू करना हम सभी का कर्तव्य है।’

नित्य शास्त्र के मूल सिद्धांत का उल्लघंन कर रहे हैं
कुछ पटाखों को रोके जाने के मुद्दे पर खान ने कहा, ‘नैसर्गिक है, कोई भी कुछ ऐसा करने को नहीं कहेगा जो कानून का उल्लंघन करता है। मैंने बार-बार यही कहा है।’ खान ने कहा कि लोक अभियोजक साओवेअर में ‘आप स्वयं अपने न्यायाधीश नहीं हो सकते।’ उन्होंने कहा, ‘आप स्वयं के बारे में निर्णय लेकर न्यायशास्त्र के मूल सिद्धांत का उल्लंघन कर रहे हैं।’

'केरल सरकार मुझे अंधेरे में रख रही है', गवर्नर खान का आरोप- विधायिका का गलत इस्तेमाल हो रहा है

सहकारीपाल के उच्च न्यायालय के विरुद्ध उपशीर्षक सरकार
यूनिवर्सिटी से जुड़े मॅकॅरीज पर खान ने सवाल-जवाब करते हुए कहा कि वॅकॅरी में जिन मॅाक्युरिटीज के कुल उद्यमियों की वकालत की बात कही गई है, उनके द्वारा जाने वाले खर्चे को कौन जानता है, संबंधित प्रोजेक्शन कहां हैं? उन्होंने सवाल किया, ‘अगर किसी तरह का खर्चा हो रहा है तो क्या उन्हें धन उधार माना जाएगा या नहीं? यदि यह धन अकादमी है तो पहले राज्यपाल को छूट मिलनी चाहिए या नहीं?’ राज्य सरकार ने पिछले सप्ताह कहा था कि खान ने उच्च न्यायालय के खिलाफ रुख अपनाया है क्योंकि उन्होंने विधानसभा से कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर अपनी संवैधानिक कर्तव्य का निर्वहन नहीं किया है।

टैग: राज्यपाल, उच्च न्यायालय, केरल सरकार, राज्य सरकार, सुप्रीम कोर्ट



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