बिहार में आरक्षण. बिहार में आर्थिक वैज्ञानिक सर्वेक्षण रिपोर्ट आने के बाद अब नीतीश का आंकड़ा भी बढ़ रहा है। बिहार विधानसभा में 50 प्रतिशत से 65 प्रतिशत तक का प्रस्ताव रखा गया है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (मुख्यमंत्री नीतीश कुमार) ने कहा है कि राज्य में एससी को 20 प्रतिशत, एसटी को 2 प्रतिशत, सोलोमन और ईबीसी को कुल 43 प्रतिशत और ईडब्ल्यूएस को 10 प्रतिशत का लाभ मिलेगा। बता दें कि केंद्र सरकार ईडब्ल्यूएस क्लास के लिए पहले से ही 10 प्रतिशत का कोट निर्धारित कर चुकी है। ऐसे में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सामने बड़ी चुनौती आने वाली है कि गरीबी रेखा से नीचे जीवन जीने वाले मुस्लिम और अगड़ी परिवार के गरीब परिवार को वह नीतीश के किस फॉर्मूले के तहत लाभ दिलाएंगे? विशेषकर, गरीब भूमिहार, ब्राह्मण, राजपूत और मुस्लिम में अगड़ी सेना के गरीब परिवार की भी ताजपोशी की मांग उठेगी।
बताएं कि सामान्य जनजाति में भूमिहार जाति का हाल सबसे बुरा है। पहले इनके बारे में कहा गया था कि जमीन पर सबसे ज्यादा यही जाति के लोग जोते हैं। लेकिन, आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट में उनकी स्थिति और गिरावट हो गयी है. भूमिहार जाति में 27.58 प्रतिशत लोग गरीबी रेखा से नीचे जीवन व्यतीत कर रहे हैं। बिहार जातिगत सर्वेक्षण रिपोर्ट 2023 के अनुसार राज्य में अतिपिछड़ा और भूमिहार जाति में गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों में कोई खास अंतर नहीं है।
बिहार सरकार के आंकड़ों के अनुसार राज्य में 34.13 प्रतिशत परिवारों की मासिक आय 6000 रुपये है।
नीतीश कुमार के सामने ये हैं बड़ी चुनौती?
वहीं, बिहार सरकार के नियमों के मुताबिक राज्य में 34.13 प्रतिशत परिवारों की मासिक आय 6000 रुपये है. ताज्जुब की बात यह है कि इसमें बैक, अल्ट्रा बैक और एससीएसटी के साथ-साथ सपोर्ट भी शामिल हैं। राज्य में 29.61 प्रतिशत परिवार की मासिक आय 6000 से 10000 के बीच है। यानी बिहार में 10 हजार तक प्रति माह वाले परिवार की संख्या 64 प्रतिशत है।
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वहीं, 18.06 प्रतिशत परिवारों की दुकानें 10 हजार से ज्यादा और 20000 हजार से कम है। 20 से 50 हजार के मासिक वार्षिकी वाले परिवारों की संख्या 9.83 प्रतिशत है। जबकि, 50 हजार से अधिक मासिक परिवार वाले परिवारों की संख्या 3.90 प्रतिशत है। हाल में हुए सर्वेक्षण में राज्य के 4.47 प्रतिशत लोगों ने अपने परिवार की आय की जानकारी नहीं दी। यानी बिहार देश के कई राज्य जैसे झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और असम जैसे राज्य भी पीछे हो गए हैं। इस रिपोर्ट के अनुसार बिहार की जनसंख्या गरीब है।
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क्या दिखाते हैं लोग
भूमिहार जाति से पट्टेदारी वाले संजीव कुमार कहते हैं, ‘इस रिपोर्ट में सामान्य वर्ग में भी सबसे अधिक गरीब भूमिहार समाज के लोग हैं। इस रिपोर्ट के अनुसार 27.58 प्रतिशत भूमिहार परिवार गरीब हैं, जबकि ब्राह्मणों में 25.32 प्रतिशत परिवार गरीब हैं। वहीं, राजपूत परिवार 24.89 फीसदी गरीब हैं। इसी तरह 13.83 प्रतिशत कायस्थ परिवार गरीब हैं। अगर सामान्य जाति में शेखों की बात करें तो उनकी कुल जनसंख्या 25.84 प्रतिशत, पैन में 22 .20 प्रतिशत और शेखों में 17.61 प्रतिशत परिवार गरीब है। कुल मिलाकर सामान्य वर्ग में 25.9 प्रतिशत परिवार गरीब हैं।
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बता दें कि हाल ही में बिहार में कास्टगेट के आंकड़े सार्वजनिक किये गये थे. इसके अंतर्गत अगड़ी सीट में राजपूतों की जनसंख्या 3.45 प्रतिशत, भूमिहार 2.86 प्रतिशत, कायस्थ 0.60 प्रतिशत और ब्राह्मण 3.65 प्रतिशत थी। आंकड़ों की रेटिंग तो हाल के वर्षों तक बिहार के इन अगड़ी पार्टियों का ज्यादातर वोट नीतीश कुमार के पाले में गिरता था, लेकिन आंकड़ों से अलग होने के बाद शायद नीतीश कुमार अब नए वोटबैंक बनाने की तैयारी में निकल गए हैं।
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पहले प्रकाशित : 7 नवंबर, 2023, 19:41 IST
