रामकुमार नायक, रायपुरः दीपावली का त्यौहार हिन्दू धर्म में बहुत बड़ी व्याख्या है। इस त्योहार पर लोग अपने-अपने घर की साज-सज्जा के साथ-साथ खरीददारी भी करते हैं। आपको बता दें कि दीपावली पर दीपक जलाए जाते हैं। हाँ, पौराणिक कथाओं के अनुसार, श्रीराम 14 वर्ष के वनवास के बाद जब अयोध्या भगवान वापस आये थे। तब अयोध्यावासियों ने अपना स्वागत लाखों दीपों से किया। यह परंपरा आज भी पूरे देश में शामिल है। दीपावली के दिन लोग अपने घर को दीपक जलाते हैं।
दिवाली के दिन मां लक्ष्मी और भगवान श्री गणेश जी की पूजा-अर्चना की जाती है। इनमें से एक से हंगामा एक रंग-बिरंगे गूंजने का चलन है, लेकिन मिट्टी के दीयों का आज भी उनका कोई उत्तर नहीं है। वैसे भी मिट्टी के दीयों को सबसे शुद्ध माना जाता है। वहीं राजधानी रायपुर में दीये बेच रहे कुंभकार ने बताया कि इस बार के शानदार ट्रेडिशनल दीये के अलावा, नए डिजाइन वाले भी बाजार में आए हैं, हमारे पास तेरा कोटा का भी उत्पाद है।
दीए बेचकर करते हैं अच्छी कमाई
कुंभकार ने बताया कि दीपावली में लक्ष्मी पूजा के लिए हाथी घोड़े की मूर्तियां भी होती हैं। उन्होंने बताया कि पिछले 25 वर्षों से नीचे दिए गए हैं। पहले माँ पापा स्क्रीनशॉट थे, अब मैं भी उनकी दुकान में हाथ बटाता हूं। इस सीजन में दीए बेचकर अच्छी कमाई हुई है। यह दुकान पंडरी मंडी गेट के पास हनुमान मंदिर के बाजू में दीये की दुकान सजी है, सुबह 9 बजे से रात 9 बजे तक दुकान खुली रहती है।
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पहले प्रकाशित : 7 नवंबर, 2023, 22:14 IST
