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दिल्ली- दुल्हन की हवा में ऐसा क्या? जो तुम्हें बीमार नहीं बहुत बीमार बना रहा है


दिल्ली- बॉलीवुड में वायु प्रदूषण की समस्या विकराल हो गई है। कोर्ट सुप्रीम चिंता है और राज्य को stsquare सख़्त कदम उठाने को कहा है। एनजीटी ने 7 राज्यों को भी नोटिस जारी किया है। स्वास्थ्य सेवा इसे ‘हेल्थ एमर्जेंसी’ करार दे रही हैं। अंतिम- दिल्ली एयरलाइंस का एयरोस्पेस (AQI) इतना क्यों जारी किया गया? हवा में ऐसा क्या है जो आपको बीमार नहीं बना रहा है? आयें हैं…

दिल्ली- महराज की हवा को पिज्जा बना रही ये 5 चीजें…

पीएम 10 और पीएम 2.5
दिल्ली की हवा में कई तरह के विध्वंस तत्व हैं। सबसे पहला है पीएम 10 और दूसरा 2.5. ये तीन महीन कण होते हैं जो पृथ्वी के रास्ते से बहुत आसानी से फेफड़ों तक पहुंच जाते हैं। 10 और 2.5 में से एक में वृद्धि की वजह पर अली के जन्म होने वाला धुआं तो है ही।

इसके अलावा फैक्ट्रियों से फ़्लोरिडा फ़्लोरिडा फ़्लोरिडा, फ़्लोरिडा एक्टिविटीज़, सड़क पर फ़्लोरिडा फ़्लोरिडा और फैक्ट्रियों से फ़्लोरिडा फ़्लोरिडा प्रदूषण है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि पीएम 10 और पीएम 2.5 से मोटापा, हार्ट अटैक, ब्रोंकाइटिस जैसी बीमारियां हो सकती हैं।

अध्ययन (NO2)
प्रशिक्षित विशेषज्ञ NO2 डीजल, पेट्रोल और अन्य प्रकार के धुएं से हवा में धुआं उठता है। विशेषज्ञों का कहना है कि सड़क पर चलने वाली सड़कें और पावर प्लांट इसके सबसे बड़े आंकड़े हैं। अमेरिका की पर्यावरण संरक्षण एजेंसी का कहना है कि हवा में NO2 की मात्रा अधिक हो तो इससे शरीर और सांस लेने में भी दिक्कत हो सकती है। संक्रमण भी हो सकता है.

1.4 प्रतिशत (SO2)
दिल्ली- कंपनी के हवा में फर्नीचर यानी SO2 की मात्रा भी अच्छी पाई गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय तो प्लास्टर में SO2 का सबसे बड़ा स्रोत बिजली संयंत्र और औद्योगिक इकाइयों में कोयला वाला कोयला जला हुआ है। कच्चे माल की मात्रा से अधिक होने से हृदय से संबंधित विकार होते हैं।

SO2 का हृदय से लेकर पृथ्वी पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। विशेषज्ञ हैं कि चॉकलेट प्लांट (सल्फर डाइऑक्साइड) इंसानों के लिए खतरनाक है, साथ ही यह पेड़-पौधों को भी बहुत नुकसान पहुंचाता है।

आमला (NH3)
दिल्ली की हवा में अमोनिया (अमोनिया) भी है। सिद्धांत के अनुसार खेती में जिस तरह से रासायनिक खादों का उपयोग बढ़ाया जाता है, उसमें अमोनिया (अमोनिया) की मात्रा भी खासी होती है। फसल कटाई के बाद यह अपशिष्ट पदार्थ के रूप में बस्ती में घूम रही है। अमा गैस नाइट्रेट और सल्फ्यूरिक एसिड के साथ मिलकर नाइट्रेट की बारी का निर्माण होता है। ये छोटे-छोटे कण हवा में चले जाते हैं और फेफड़े को नुकसान पहुंचाते हैं।

एलईडी (पंजाब)
दिल्ली- मजहब की कंपनी हवा के पीछे लेड या शीशा (Pb) भी बड़ी वजह है। यह प्राकृतिक रूप से पृथ्वी की ऊपरी सतह की पपड़ी में स्थित है। यदि इसके लिए अधिक संपर्क की आवश्यकता है तो स्वास्थ्य के लिए बहुत खतरनाक साबित हो सकता है।

दिल्ली-एनसीआर की हवा में ऐसा क्या?  जो तुम्हें बीमार नहीं बहुत बीमार बना रहा है

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के सुझावों में क्रैसिलिंग प्रोजेक्ट, रीसाइकिलिंग प्रोजेक्ट, निमार्ण कार्य एजेंसी एसोसिएशन का नेतृत्व किया जा रहा है। यह छोटे बच्चों के लिए सबसे ज्यादा बिकाऊ है। इंटरनेट के माध्यम से वीडियो क्लिप बच्चों को चार से पांच गुना अधिक नुकसान हो सकता है।

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