आशीष कुमार/पश्चिम चंपारण. बकरी, करैला, लहसुन और अदरख इन सभी को एक बार में या फिर एक बार में स्वाद बढ़ाने के लिए खाना पड़ेगा। लेकिन आपने कभी इनका स्वाद आचार्य के रूप में क्या लिया। यदि नहीं, तो पश्चिम चंपारण जिला मुख्यालय बेतिया में लगे पर्यटक मेला तक पहुंचें। यहां से आप 280 से 300 रुपये प्रति किल्स की दर से खरीद कर इन रोल के अचार का स्वाद चख सकते हैं। इसे कोलकाता के आदिवासियों ने खुद की फैक्ट्री में बनाया है, जिसकी फैक्ट्री के लिए स्टॉक एक्सचेंज चंपारण आते हैं।
बकरी, करैला, लहसन, अदरक, कटहल और गाजर के अचार
पश्चिम चम्पारण जिले में स्थित मखमल का महल है। व्यापार को बढ़ावा देने के लिए यहां विभिन्न राज्यों से व्यापार को बढ़ावा दिया जा रहा है। मित्र मंडल में से एक हैं नंदकिशोर, जो आचार्य एवं मुरब्बे के बड़े व्यवसाय हैं। कोलकाता के बड़े बाजार में खुद की फैक्ट्री है, जहां वे मुरब्बे और अचार तैयार करते हैं। नंदकिशोर के पास कुल 40 प्रकार के अचार हैं, जिनमें सबसे महंगे गोभी, करैला, लहसन, अदरक, कटहल, गाजर और कोरोंडे का अचार है।
मजे की बात यह है कि अधिकांश लोगों ने 30 के रूप में यात्रा की होगी, लेकिन चंपारण में इसे सहायक आचार्य के रूप में देखा जा रहा है। इनका स्वाद बेहद ही अनोखा है, क्योंकि कई मसालों के मिश्रण से बनाया गया है। आम तौर पर वे इन आचार्यों को पश्चिम बंगाल और राजस्थान में ले जाते हैं, लेकिन वे बिहार आये हैं।
250 से 280 रुपये प्रति किलो का भाव
नंदकिशोर के अनुसार, और आम मिर्च के अचार की तुलना में कीमत थोड़ी अधिक है। साथ में अन्वेषी बनाने का तरीका भी अलग है. लौकी के अचार को बनाने के लिए सबसे पहले नारियल का अचार लिया जाता है. फिर ठंडी करके मसाले के मिश्रण के साथ घंटों तक काम किया जाता है। ठीक प्रकार एक ही करैले, गाजर, अदरक और करौंदे के अचार को बनाने का तरीका भी सामान्य अचार से अलग है। जहां बकरी और करैले का अचार 280 रुपए प्रति सवारी है, तो वहीं अदरक, गाजर, कोरोंडा और लहसन का अचार 250 रुपए प्रति सवारी है।
.
टैग: बिहार के समाचार, चम्पारण समाचार, खाना, भोजन 18, स्थानीय18
पहले प्रकाशित : 8 नवंबर, 2023, 14:47 IST
