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आईआईटी मुंबई की महिला प्रोफेसर फलस्टीनी एक्सट्रीमपंथियों के समर्थन में छात्रों ने दर्ज कराई शिकायत


मुंबई. भारतीय शिक्षण संस्थान (एआईटी) मुंबई के छात्रों ने फलस्टीनी चरमपंथियों के समर्थन में एक ऑनलाइन व्याख्यान के दौरान एक प्रोफेसर और एक अतिथि वक्ता के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। एक अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

छात्रों ने बुधवार को मानविकी एवं विज्ञान सामाजिक (एचएसएस) विभाग की प्रोफेसर शर्मिष्ठा साहा और अतिथि वक्ता सुधासंवा देशपांडे के खिलाफ कार्रवाई की मांग की याचिका दर्ज की।

एक छात्र ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘अकादमिक पाठ्यक्रम ‘एचएस 835 सिद्धांत थ्योरी एंड प्रैक्सिस’ के ओयायन्स पूर्ण और तथ्यात्मक रूप से उत्साहपूर्ण खबरों पर छात्रों को विश्वास दिलाने के लिए इस तरह की वकालत करने के लिए प्रोफेसर शर्मिष्ठा साहा के कोशिश की हम निंदा करते हैं।’

पुलिस को दी गई अपनी शिकायत में छात्रों ने दावा किया है कि साहा ने अपने ड्राइवर HS835 पर देशपांडे (एक कट्टर चरित्र) को आमंत्रित करने के वास्ते अपने पद का डुरूपयोग किया था। छात्रों ने आरोप लगाया कि देशपांडे ने फलस्टीनी एक्सट्रीमपंथी जकारिया जुबैदी के कसीदे का मतलब बताया, और मुंबई की आध्यात्मिक अखंडता और सुरक्षा के लिए संकटकारी परिणाम हो सकते हैं।

याचिका में कहा गया है, ‘कार्यक्रम के दौरान देशपांडे ने एक बयान दिया, जिससे गंभीर चिंता पैदा हुई है।’ उन्होंने न केवल 2015 में फलस्तीनी नरसंहार जुबैदी से मुलाकात की बात स्वीकार की, बल्कि हिंसा और सशस्त्र विद्रोह का विद्रोह व महिमामंडन ने किया।’

याचिका में कहा गया है कि जुबैदी, अल-अक्सा मार्टस ब्रिगेड को संयुक्त राज्य अमेरिका, यूरोपीय संघ और इजराइल सहित विभिन्न देशों के आरक्षण और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों ने एक संगठन घोषित किया है।

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शिकायत के अनुसार, अल-अक्सा मार्टस ब्रिगेड गेब्रियल और जनरल के बीच साझा हमला करने से जुड़ी कई घटनाएं जुड़ी हुई हैं, इसलिए प्रोफेसर और वक्ता का ऑर्गनाइजेशन से गंभीर उदाहरण पैदा हो सकते हैं।

आईआईटी मुंबई की महिला प्रोफेसर ने किया फलस्टीनी एक्सट्रीमपंथियों का समर्थन, शिकायत दर्ज

याचिका में, देशपांडे के समर्थकों से कहा गया है, ‘फालस्टिनियों का संघर्ष एक स्वतंत्रता संग्राम है और विश्व उपनिवेशवाद के इतिहास में ऐसा कोई संघर्ष नहीं हुआ, जो शत प्रतिशत अहिंसा जारी हो। ऐसा कभी नहीं हुआ! ‘भारतीय स्वतंत्रता संग्राम भी 100 प्रतिशत अहिंसा नहीं था।’

टैग: आईआईटी बॉम्बे, फिलिस्तीन



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