निखिल कौशिक/सहारनपुर: दक्षिण भारत का प्रमुख व्यंजन डोसा लोगों को खाने में स्वादिष्ट लगता है। शिवालिक की पहाड़ियों के तलहटी में बसे रेगिस्तान में भी बनाई गई एक कलाकृति डोसा लोगों को काफी पसंद आ रही है। डोसा बनाने वाले आर्टिस्ट की दुकान पर स्वादिष्ट डोसा खाने वालों की लाइन लगी रहती है। डोसा बनाने वाले कारीगरों का कहना है कि वह व्यंजन तैयार करने के दौरान गुणवत्ता और स्वतंत्रता का ध्यान रखते हैं।
विस्थापित के कोर्ट रोड स्थित पवन बेला मार्केट के बाहर दुकान चलाने वाले कलाकार हेमा हवाई ने बताया कि वह करीब 10 साल से पुनर्वास में डोसा बनाने का काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि डोसा बनाने वाला मुख्य स्टूडियो का ही रहना है। जो विभिन्न प्रकार की रेसिपी से डोसा तैयार करते हैं। उन्होंने बताया कि दक्षिण भारत के प्रमुख व्यंजन डोसा का स्वाद लेने के लिए शहर और देहात के ग्राहक आते हैं।
कई तरह के डोसा बनाते हैं
हेमा हलवाई ने बताया कि इसी तरह करीब 70 तरह की रेसिपी से डोसा बनाया जाता है. लेकिन शुद्ध चाट भंडार पर पांच प्रकार का डोसा मंगाया जाता है। उन्होंने बताया कि पनीर, मसाला, ओनियन, उत्तम आदि प्रकार का डोसा शुद्ध चाट भंडार का निर्माण किया जाता है। हेमा ने बताया कि डोसा में प्रयोग होने वाली चिप्स में प्याज, हरी मिर्च, धनिया, अदरक आदि को तेल में भूनकर तैयार किया जाता है। उन्होंने बताया कि हम डोसे में अनुवर्ती रेसिपी खुद ही तैयार करते हैं।
खुद को तैयार करना समानार्थी हैं
हेमा हलवाई ने बताया कि डोसे की रेसिपी में तैयार होने वाला मसाला हम खुद ही तैयार करते हैं। बाज़ार से केवल एमडीएच का मसला खरीदा जाता है। बाकी साबुत प्रयोगशाला उन्हें घर पर कूटकर तैयार कर लेती है। उन्होंने बताया कि शुद्ध चाट भंडार पर 70 रुपये से लेकर 150 रुपये तक का दोसा बेचने को दिया जाता है। उन्होंने बताया कि मुख्य रूप से मसाला डोसा की पहली पसंद होती है। हेमा ने बताया कि इसके अलावा अन्य प्रकार की खुराक की भी इच्छा होती है। जिसमें शामिल हैं यूरोप से आने वाले ग्राहक पैक करा घर भी ले जाते हैं।
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पहले प्रकाशित : 9 नवंबर, 2023, 08:45 IST
