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मां लक्ष्मी की पूजा के 10 तरीके बताए जा रहे हैं ज्योतिषाचार्य
माँ लक्ष्मी जी की पूजा में वनस्पती का अभिषेक करना चाहिए। इनमें फल, फूल और पत्र शामिल हैं।
दीपावली पूजन विधि: दीपावली की सबसे बड़ी प्रतिमाओं में से एक है। रात को देश भर में धन और वैभव की दाता लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है और मां लक्ष्मी की कृपा बनाए रखी जाती है और भव्य रूप से घर में निवास करने की प्रार्थना की जाती है। इस दिन सभी अपनी सामथ्र्य के अनुसार पूजन करते हैं, साथ ही लक्ष्मी जी को भी पूजा-अर्चना करते हैं, लेकिन फिर भी इस पर्व पर समय और लग्न का विशेष सिद्धांत माना जाता है। कहा जाता है कि यदि शुभ लग्न में लक्ष्मी की पूजा की जाए तो उसका फल शुभ और सुखदायक होता है।
वहीं अगर शुभ-अशुभ का विचार रखते हुए लक्ष्मी लक्ष्मी की पूजा की जाती है तो उनके साकारात्मक प्रभाव होने पर भी फल नहीं होता है और जीवन संकटों से दूर रहता है। आज हम आपको सलाह दे रहे हैं कि अगर आपको लक्ष्मी जी का दर्शन करना है और हमेशा अपने घर में धन धान्य और संपदा बनाए रखना है तो दीपावली के दिन की पूजा कैसे करनी चाहिए। यहां जानिए..
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उज्ज़ैन के जाने माने ज्यमोतिषाचार्य, वेद मर्मज्ञ और वास्तु विशेषज्ञ दुर्गेश तारे कहा जाता है कि जिस प्रकार घर के किसी बड़े बुजुर्ग को उसकी पसंद की चीजें दी जाती हैं, सम्मान दिए जाते हैं, उसे खुश किया जाता है और वे अपनी आर्शीवाद देते हैं, उसी प्रकार मां लक्ष्मी की विधि विधान से पसंद करके नीम से पूजा कर सकते हैं। इससे उनकी कृपालुता और जीवन सुख सुविधा से भरा रहता है।
तीन तरह के रेस्तरां हैं लक्ष्मी माँ
दुर्ग तारे कहते हैं कि मां लक्ष्मी 3 परेश परेश हैं। पहला हाथी, दूसरा कमल और तीसरा वाहन उल्लू बताया गया है। हाल यह है कि जब भी लक्ष्मी जी की मूर्ति या तस्वीर बनी तो उन्हें गज या कमल पर आसीन होना चाहिए। छोटे हाथी और कमल पर प्रसिद्ध लक्ष्मी माँ हैं। वहीं उल्लू पर सुपरमार्केट लक्ष्मी अलक्षमामी हैं और शुभ फल देने वाली नहीं हैं। पूजा करने का कार्य यह है कि शुभ लक्ष्मी की कृपा हो।
ये वस्तुएं भी हैं लक्ष्मी, पर करें पूजा
तारे कहते हैं कि सभी लोग चाहते हैं कि लक्ष्मी जी सदैव उनके घर में रहें। इसके लिए जानें ये चीज, सबसे बड़ा सिद्धांत है लक्ष्मी माता का सिर्फ धन या पैसा नहीं। हर वो वास्तु जो आपके काम को और आपको सरलता प्रदान करता है, आपका हित करता है, वह लक्ष्मी का ही स्वैच्छिक रूप है। यहां तक कि घर पर मौजूद माता-पिता, बहन, भाई, पर्यावरण, वाहन, रोजगार के साधन, आपके चारों ओर मौजूद वस्तुएं जो दिन रात काम कर रही हैं, वे सभी लक्ष्मी हैं। दीपावली के दिन सभी को पूजन करना चाहिए।
पूजा का समय करें ये काम
तारे कहते हैं कि 24 घंटे में 3 लग्न बारी-बारी से रहते हैं। स्थिर लग्न, चर और द्विसदव भाव लग्न। ताजा बात यह है कि अगर आप कोई भी चीज प्रतिष्ठा के रूप में देखना चाहते हैं तो हमेशा उस काम को स्थिर लगन में शुरू कर दें। जैसे लक्ष्मी माता की सदा इच्छा होती है तो उनकी पूजा स्थिर लग्न में करें। अगर गाड़ी, जो चलायमान है, ख़रीदारी चाहते हैं तो चार लगन में उतरें। और अगर कोई ऐसा काम करना चाहता है जिससे आपका और समाज का भला हो तो उसे द्विस्वभाव लगन में शुरू करें। ये सभी लगन बारी-बारी से हर दो घंटे पर सुरक्षित रहते हैं।
माँ लक्ष्मी के दर्शन के लिए ये काम करें
दुर्गेश तारे कहते हैं कि दीपावली की रात को 10 प्रकार से शुभ लक्ष्मी की प्राप्ति के लिए लक्ष्मी जी का दर्शन करना चाहिए। ये इस प्रकार है..
. सबसे पहले घर में हैं माता-पिता तो एक बार जरूर करें प्रणाम
. भाई का सामान.
. बहन की सलाह लें.
. पति है तो पत्नी के पति और पत्नी है तो पत्नी के पति
. मित्र का मार्गदर्शन करें.
. प्रकृति और पर्यावरण का आकर्षण।
. गाड़ियों की टिप्पणियाँ करें.
. आपके यहां लोग काम करते हैं तो उनके प्रति स्टाकर हों और मिठाई-उपहार दें।
. रात्रि में सही लग्न में लक्ष्मी जी का पूजन करें।
. देर रात्रि में श्रीविष्णुसहस्त्र नाम पाठ करें।
ऐसे करें मां लक्ष्मी पूजन…
ई वॉल्वर की दुकान हमेशा वनस्पॉट से करवानी चाहिए। इसी तरह दीपावली पर मां लक्ष्मी की पूजा में ऋतु के अनुसार फल जैसे कि कालू, बेला, अनार, सेब आदि के साथ पत्र, फूल, मिठाई में मोदक या बूंदी के लोध आदि को शामिल कर करौचा मंत्र के साथ पूजा की जाती है। करें.
ये पुजारी अत्यंत शुभ हैं
तारे कहते हैं कि प्रदोष काल और वृषभ लग्न की शाम को अत्यंत शुभ माना जाता है, ऐसे में सभी को इस लग्न में लक्ष्मी पूजन करना चाहिए। इस बार की पूजा शुभ लग्न शाम 6 बजे से 8 बजे तक है। इस समय पूजा करने से शुक्र की कृपा, सुख सुविधा वैभव और विलासिता का फल मिलेगा।
वहीं इसके बाद रात्रि में सिंह लग्न आएगा, लग्नाधिपति सिंह का लग्न दो घंटे का होगा। इस दौरान पूजा करने से भी शुभ फल मिलता है। वहीं यदि इस समय लक्ष्मी माता मंत्रोच्चारण किया जाता है, भजन और पूजन किया जाता है तो उनका फल अक्षय रूप में स्थापित होता है। इस समय पूजन करने से घर में स्थिर रूप से लक्ष्मी जी का आगमन हुआ। इस लग्न रात्रि 12 से 12 बजे तक भगवान विष्णु की पूजा जरूर करें और इसी लग्न में ग्रह शास्त्र और विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ अवश्य करें।
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पहले प्रकाशित : 11 नवंबर, 2023, 18:31 IST
