कोरबा. छत्तीसगढ़ के तटीय क्षेत्र सरगुजा और कोरबा में चुनावी प्रचार में हाथी लगातार बाधा बने हुए हैं. यहां हाथियों का इतना आतंक है कि सन ढ़लने ने सबसे पहले उन्हें चुनाव प्रचारित किया था। वोटिंग में ये हाथी बाधाएं न रेस्टॉरेंट वोटिंग वोटिंग पर वन अमला भी स्थापित किया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ के पाली तनाखार और जिपं सदस्य सभा हाथी क्षेत्र प्रभावित हैं। यहां शाम ढलने से पहले उन्हें प्रमोट किया जाता है। वोटिंग तक पर हाथियों के हमलों का डर बना हुआ है। मतदान संस्था से हाथियों को दूर रखने के लिए विभाग ने कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई है।
हाथी ब्रेक पर प्रचार
कोरबा में चुनावी प्रचार पर हाथी ब्रेक लगा रहे हैं. यही कारण है कि कई क्षेत्रों में सूरज ढलने से पहले ही उन्हें बढ़ावा दिया जाता है। छत्तीसगढ़ के ये वे इलाके हैं जहां दूसरे चरण में 17 नवंबर को मतदान होना है। विधानसभा चुनाव का प्रचार अब शबाब पर होना चाहिए क्योंकि अब सिर्फ तीन दिन बाकी हैं। रविवार 15 नवंबर शाम 5 बजे प्रचार-प्रसार होगा। चिंता इस दौर में अपनी पूरी ताकत से जुड़े हुए हैं। लेकिन हाथी का डर उन्हें रोक रहा है।
शाम होती है ही दोस्त
पाली-तानाखार और अलग-अलग विधानसभा क्षेत्र के हाथी प्रभावित क्षेत्र में ऐसा खतरा है कि शाम को अंधेरा होने से पहले ही उन्हें प्रचारित किया जाता है। मुख्य मार्ग को जोड़ने वाली सप्ताहांत पर सजातीय पासर जाता है। क्योंकि कब कहाँ से हाथियों का झुंड आ जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता। कभी-कभी भी सड़क पार करते हुए आसपास हाथी ही रहते हैं। कोई भी राजनीतिक दल शाम को चुनाव प्रचार के बाद खतरे का मोल नहीं लेना चाहता।

धान की कटाई में कटे किसान
दूसरी तरफ धान का कारोबार शुरू हो गया है, किसान अपने खेतों में धान की कटाई कर रहे हैं। उन्हें भी हाथों का डर सता रहा है। कोरबा जिले का कटघोरा वन मंडल इन दिनों हांथीनियो से अधिक प्रभावित है। चोटिया से कॉर्बी पाली के बीच और कॉर्बी से पसान के बीच हाथियों को ज्यादा मजा आता है। इसके साथ ही एन एच 130 में चोटिया से केंडी के बीच कभी भी हाथी रोड पर आ जाते हैं। अभी 30 से अधिक हैंडियों का झुंड कोरबी के आसपास और पसान में 15 से अधिक हैंडियों का झुंड घूम रहा है। झुंड एक दिन में 15 से 20 किलोमीटर की दूरी तय करता है। इसकी वजह से यह पता ही नहीं चला कि कहां, हाथी कब पहुंचा। चोटिया के लोगों का कहना है कि शाम के समय सड़कों पर छुट्टी हो जाती है। दार्शनिक के कार्यकर्ता भी अँधेरा होने के पहले लौट जाते हैं।
द्वितीय समस्या
हाथियों के कारण किसानों और नेताओं के सामने समस्या बनी हुई है। किसानों को सालभर की और 5 साल की मेहनत पर पानी न मिले, यह चिंता का विषय है। छत्तीसगढ़ में अब 17 नवंबर को दूसरे चरण का मतदान होना है। हाथी के कारण प्रचार में बाधा बनी हुई है। दूसरी तरफ किसान धान की कटाई की टोकरी। राजनीतिक को डर है कि वो प्रचार कम कर रहे हैं। और फिर हाथीदांत वोटिंग रेस्तरां को प्रभावित न कर दिया। दूसरी तरफ खेत में साझा किसान वोट के लिए मतदान करने तक पहुंचें या नहीं। किसानों को भी हाथियों का डर सता रहा है। कहीं हाथी अपने साल भर की मेहनत पर हाथी पानी न फेर दे।
वन विभाग की टीम के लिए हाथियों को भागें
हाथियों की संख्या और उत्पात के बीच प्रभावित क्षेत्र 61 से भी अधिक मतदान केन्द्र बने हैं। पाली-तानाखार और संसदीय क्षेत्र सर्वाधिक हाथी प्रभावित क्षेत्र हैं। कटघोरा वन मंडल के डीएफओ कुमार निशांत ने बताया कि कटघोरा वन मंडल के अलग-अलग रेंज में 60 हाथियों का दल मौजूद है। वन अमला नियमित पर्यवेक्षण कर रहा है। प्रभावित मतदान केंद्र के कैलिफोर्निया से अपील की गई है कि शाम ढलने से पहले 17 नवंबर को अपना मतदान करें। हाथियों को प्रभावित करने वाली संस्था से दूर भागने के लिए वन विभाग के अधिकारियो कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है।
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पहले प्रकाशित : 13 नवंबर, 2023, 14:33 IST
