उत्तर
तनाव के कारण टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का उत्पादन कम होता है जिसके कारण स्पर्म का उत्पादन भी कम लगता है।
पदार्थ के सेवन से शुक्राणु की संख्या और गुणवत्ता दोनों दिखती है।
बुरी आदतें घटाती हैं शुक्राणुओं की संख्या: पश्चिमी देशों की देखा-देखी जो आधुनिकता पथ चल रहा है, उससे हर तरह का नुकसान हो रहा है। इस आधुनिकता का मतलब है लोग जंक फूड, फास्ट फूड, पब, डिस्को आदि को समझने में लगे हैं लेकिन इन सभी में स्वास्थ्य की कीमत चुकानी पड़ रही है। इन आधुनिकता वाले जानवरों के तरह-तरह के खाद्य पदार्थ होते हैं, इनमें से ज्यादातर स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा करते हैं और कई बीमारियां होती हैं। इन पब, डिस्को में सीता, शराब और मोर्टार की बहार होती है। दूसरी ओर शहरी जीवन और जिम्मेदारी में अधिकांश लोग फिजियोलॉजी में भर्ती हो गए हैं। ये दोनों कारण शरीर को कई तरह की बीमारियां तो देते ही हैं साथ ही पुरुषों में बांझपन को भी बढ़ा देते हैं।
पुरुषों में बांझपन के लिए सबसे अधिक भोजन व्यवसायियों का अवैध प्रभाव और बुरी आदतें जिम्मेदार है। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि कंसीव करने से संबंधित महिलाओं में मोटापा होता है, इनमें पुरुषों के लिए खराब शुक्राणु जिम्मेदार होते हैं। और इस खराब शुक्राणु के लिए बुरी आदतें जिम्मेदार होती हैं। माओ क्लिनिक के अनुसार एक वयस्क पुरुष में अगर प्रति व्यक्ति 1.5 करोड़ से कम स्पर्म की संख्या है तो इसे स्पर्म की कमी माना जाता है। इससे कम स्पर्म कील के लिए आदर्श नहीं है।
ख़राब शुक्राणु के लिए जिम्मेदार ये आदतें
1. मुख्य वजन-जितना अधिक हम आधुनिक रूप से फास्ट फूड, जंक फूड, फूड फूड, लॉज फूड ही खाते हैं, हमारे शरीर का वजन बढ़ता है। अधिक वजन वाले शुक्राणु के लिए शत्रु से कम नहीं होता है। मेयो क्लिनिक के अनुसार स्पर्म की गुणवत्ता प्रभावित होती है। फूड फूड, फास्ट फूड और डीप फ्री वाली चीजें स्पर्म प्रोडक्शन कम कर देती हैं और प्रोडक्शन वाले हार्मोन को नुकसान पहुंचाता है जिससे स्पर्म की गुणवत्ता और संख्या दोनों खत्म हो जाती हैं।
2. शराब-हम सब जानते हैं कि शराब हमारी जान की दुश्मन है। शराब हमारी सेहत के लिए किसी की भी अपील ठीक नहीं है। लेकिन अगर युवाओं में शराब की लत लग जाए तो इससे बांझपन का खतरा बढ़ जाएगा। शराब के सिद्धांत के कारण स्पर्म कोट और स्पर्म की गुणवत्ता दोनों खराब होती है। इससे पिता बनने में परेशानी हो सकती है। इसलिए इन सिफ़ातियों को छोड़ दें.
3. राक्षस -आज के आधुनिक समाज में स्कूल की उम्र से ही कुछ लोगों में छात्र-छात्राओं की आदत लग जाती है। गॉडेस्ट भी स्पर्म के लिए बहुत बड़ा विलेन है. पदार्थ के सेवन से शुक्राणु की संख्या और गुणवत्ता दोनों दिखती है। जिन एनाबॉलिक बैक्टीरिया का उपयोग जिन मसालों के लिए किया जाता है उनमें भी मसाले की मात्रा होती है, इसलिए यह भी शुक्राणु की गुणवत्ता को खराब करता है। कोकिन, हीरोइन, सीबीए आदि स्पर्म की गुणवत्ता और फिल्में बर्बाद हो जाती हैं।
4. वर्कशाप-तंबाकू का किसी भी रूप में सेवन खतरनाक है। विषाक्तता सिर्फ कैंसर का ही कारण नहीं बनती है बल्कि यह शरीर में सैकड़ों प्रकार के नकारात्मक प्रभावों के लिए जिम्मेदार होती है, इनमें शुक्राणु की संख्या और गुणवत्ता का खराब होना भी जिम्मेदार होता है। टॉक्सिक या सीताफल का सेवन न करें। अगर ऐसा होगा तो पिता बनने की उम्मीदों पर फिर से पानी डाला जा सकता है।
5.तनाव-तनाव या अवसाद शरीर में 1300 केमिकल कणों को जन्म देता है। शरीर में केमिल्क का उफान के कारण तनाव खड़ा हो जाता है। तनाव के कारण स्पर्म की क्वालिटी खराब हो जाती है। यदि किसी पुरुष में बहुत अधिक तनाव रहता है तो शुक्राणु की संख्या और गुणवत्ता प्रभावित होती है। तनाव के कारण टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का उत्पादन कम होता है जिसके कारण स्पर्म का उत्पादन भी कम लगता है।
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पहले प्रकाशित : 15 नवंबर, 2023, 19:59 IST
