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कद्दू के फायदे: अवसाद से भागे, बूढ़ेपे को भगाए, स्वाद से भरपूर इस सब्जी का है दिलचस्प सफर


उत्तर

दिमाग के लिए भी फायदेमंद है कद्दू का सेवन
हजारों सालों से भारत में तैयार हो रही है ये विदेशी सब्जी

कद्दू की सब्जी का इतिहास, लाभ और यात्रा: कद्दू की एक गजब की सब्जी है। यह विशेष प्लास्टिक में से एक है जो शरीर अंदर से स्वस्थ है तो बाहर से सुंदर है। कद्दू का नियमित सेवन करेंगे तो अवसाद (डिप्रेशन) से बचे रहेंगे। इसका सेवन बुढापे के खाने की गति को भी कम कर देता है। इसे बालों और बालों के लिए भी बेहद जरूरी माना जाता है।

कद्दू दुनिया की उन गोलियों में से एक है, जिसे बेहद प्राचीन माना जाता है। यह पूरी दुनिया में विभिन्न आहार और व्यंजन के उपयोग के लिए उभरता है। यह वजनदार सब्जी है और पोषक तत्वों के मसाले में भी ‘वजनदार’ है। यह उन गिनी-चुनी चॉकलेट में से एक है जो शरीर के अंदर के सिस्टम को तो फॉलो करती है, साथ ही आपको बाहरी रूप से खूबसूरत बनाने में भी क़ामयाब होती है, इसलिए डॉक्टर और डायटिशियन भोजन में कद्दू को शामिल करने की सलाह दी जाती है।

कद्दू के सेवन से कुछ खास फायदे

1. कद्दू में विशेष प्रकार के विटामिन और वैक्स होते हैं जो शरीर के लिए बेहद गुणकारी होते हैं। कैलोरी व फैट के बराबर होता है तो इसमें स्टार्च, मैग्नीशियम, आयरन, आयरन, आयरन, प्रोटीन, सोडियम, कॉपर, विटामिन ए व सी पाया जाता है। जेनी-मैनी डायटिशियन एलाम्बा के अनुसार अगर आपका त्वचा तेल है तो कद्दू का फेसपैक इस्तेमाल कर सकते हैं। अगर खाल में रुखापन है तो कद्दू की प्यूरी में शहद और दूध के ढांचे लगा लें, खाल में चमकने की जगह। यह मुहासों में भी है. ख़ास बात यह है कि कद्दू में अल्फ़ा-कैरोटीन, स्टिक चीज़ और कॉम्बिनेशन और अन्य वस्तुएं पाई जाती हैं जो बाल ओबेन और उन्हें स्वस्थ बनाए रखने में विशेष भूमिका निभाती हैं।

2. कद्दू का सेवन दिमाग के लिए भी बेहद फायदेमंद माना जाता है। असल में जीवन की कई झंझटों के अलावा शरीर में ट्रिप्टोफैन की कमी अक्सर अवसाद का कारण बन जाती है। कद्दू में एल-ट्रिप्टोफेन (मानसिक अवसाद में उपयोगी घटक) की पर्याप्त मात्रा पाई जाती है, जो अवसाद और तनाव को कम करता है। एक अध्ययन में यह माना गया है कि कद्दू एक प्राकृतिक अवसादरोधी सब्जी है, इसे नियमित रूप से खाने से नींद भी अच्छी आती है।

3. कद्दू का नियमित सेवन बुढ़ापा आने की गति को कम कर देता है। इसका कारण यह है कि सेवन त्वचा और बाल स्वस्थ्य हैं। इसमें कॅल्ट्री कम होती है और स्टार्च के इस उत्पाद को प्रदर्शित किया जाता है। इसमें मौजूद बीटा कैरोटीन आंखों की रोशनी बरकरार रहती है तो इसमें मौजूद सामग्री और मैग्नीशियम हार्ट व मसल्स को बनाए रखा जाता है, साथ ही प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाए रखने में योगदान दिया जाता है। अगर शरीर इतना ज्यादा ‘मजबूत’ हो जाएगा तो बुढ़ापे का समय आगे बढ़ जाएगा।

4. आपको यह भी बता दें कि कद्दू में पाए जाने वाले विशेष चिप्स स्ट्रोक के खतरे को कम करते हैं और धमनियों (धमनियों) को सख्त होने से बचाते हैं, जिससे हाई बीपी का खतरा कम रहता है। इसका फायदा यह रहेगा कि दिल की समस्या नहीं आएगी। इसमें मौजूद विटामिन गठिया से भी शरीर को दूर रखा जाता है। यह शरीर की विषाक्तता (विषीकरण) को बाहर निकालने में भी मदद करता है।

कद्दू का इतिहास और यात्रा दिलचस्प है

भारत में हजारों वर्षों से कद्दू तैयार और तैयार किया जा रहा है, इसके बावजूद यह विदेशी सब्जी है। लेखक एवं भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. बिश्वजीत चौधरी ने अपनी पुस्तक ‘वेजिटेबल्स’ में इसकी उत्पत्ति कई हजार वर्ष पूर्व अमेरिका का उष्णबंधीय क्षेत्र मानी है। वैसे ही आज से 3 हजार वर्ष पहले लिखी गई भारत के औषधि ग्रंथ ‘चरकसंहिता’ में कद्दू (कूष्मांड) का चूर्ण, मधुर अम्ल वाला और त्रिदोष (वात-पित्त-कफ) का नाश बताया गया है।

आज अमेरिका, भारत, चीन, मैक्सिको में कद्दू की सबसे अधिक खेती होती है। आपको बता दें कि पश्चिमी देशों में हर साल 31 अक्टूबर को हैलोवीन (हैलोवीन) डे मनाया जाता है। इस दिन कद्दू की बहुत मांग और इतनी होती है. युवा वर्ग मकबरे को सजाते हुए उनके मुखौटे का चेहरा बनाते हैं और कपड़े पहनकर लोगों को दिखाते हैं।

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