उत्तर
एंजाइटी में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाया जाता है। यह सूजन से संबंधित किसी भी तरह के दर्द से राहत अप्लाई है।
एंजाइटी के कन्द से ही पिल्स या बवासीर का इलाज भी किया जाता है।
वायु आलू के फायदे: यह धरती पर कुदरत का अनमोल नमूना है। यह खराबी हवा में उड़ता हुआ आलू है। इसके कई नाम हैं. वैसे तो यह आलू की तरह होता है लेकिन प्रमाणित की लतरन में इसके कंड तैरते रहते हैं, इसलिए इसे एयर पोटाटो कहा जाता है। कुछ स्थानों पर इसे अंगीकार कहा जाता है। इसके साथ ही इसे एयर यम, बीटर यम, चिकी यम, एरियल यम और पर्सनिप यम भी कहा जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम डायोस्कोरिया बल्बीफेरा (Dioscoreabulbifera) है। एंजाइटी का उपयोग कई तरह की क्रोनिक सर्जरी में किया जाता है। पिछले कुछ वर्षों में इस पर हुई कई शोधों के बाद फर्मास्युटिकल कंपनी का ध्यान बहुत अधिक बढ़ गया है। एंजाइटी से कैंसर, दाद, त्वचा संक्रमण, गले में खराश, ऑर्काइटिस आदि का इलाज किया जा सकता है। चीनी चिकित्सा पद्धति में इसका बहुत उपयोग किया जाता है। हालाँकि आयुर्वेद, ग्रीक और यूरोपीय मेडिसीन में भी इसका कम इस्तेमाल होता है। इस औषधि की जड़, ताना, कब्ज और पिज्जा कंद का सभी औषधीय प्रयोग किया जाता है। इसका स्वाद स्वाद और तीखा होता है।
अंगीठी के अद्भुत फायदे
1. कैंसर से बचाव-कैंसर से बचाव के लिए एंजाइटी का उपयोग चीनी चिकित्सा पद्धति से किया जाता है। साइंस डायरेक्टोरियल जर्नल के अनुसार, जब चैराहेज़ को अंतिम रूप से परीक्षण किया गया तो उसमें एंटी-कैंसर गुण पाया गया। अध्ययन के अनुसार एंजाइटी के कांड का सेवन करने से कोलन कैंसर, लिवर कैंसर और कैंसर में ट्यूमर का बढ़ना रुक जाता है।
2. रमाबाण में रेशम से संबंधित तालीम-अध्ययन में पाया गया कि एंजाइटी में एंटी-अल्कोहल, एंटी-गैंग्लफ गुण पाए जाते हैं। यह ई. कोलाई बुकमार्क को तुरंत मार दिया जाता है। त्वचा से संबंधित समस्या एंजाइटी की सूजन से प्रभावित त्वचा से संबंधित समस्या त्वचा से जुड़ी बीमारी दूर हो सकती है। इसके सेवन से स्कैल्प इंफेक्शन को कम किया जा सकता है।
3. रामबाण में गले से जुड़ी परेशानी-रिपोर्ट के मुताबिक एंजाइटी में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाया जाता है। इसके सेवन से गले में खराश, दर्द या बलगम को दूर किया जा सकता है। अंगीकार की जड़ को पेस्ट बनाकर रखें इसे दूध के साथ खाने से भी राहत मिल सकती है। रामबाण में इसका सेवन करने से रामबाण सिद्ध हो सकता है। यहां तक कि टीबी की बीमारी में भी एंजाइटी का इस्तेमाल किया जाता है।
4. पेट दर्द में – पेट का दर्द ठीक हो सकता है। वहीं एंजाइटी में बहुत अधिक मात्रा में कब्ज होता है जिसके कारण पेट से संबंधित समस्याएं जैसे गैस, कब्ज, बदहजमी, डायरिया आदि ठीक हो सकते हैं।
5. पायल्स में राहत-एंजाइटी के कन्द से ही पिल्स या बवासीर का इलाज भी किया जाता है। इसके सेवन से ऑर्काइटिस (ऑर्काइटिस) बीमारी का इलाज आसानी से किया जा सकता है। ऑर्काइटिस में पुरुषों के अंडकोष में सूजन हो जाती है। यह वायरल या वायरल होने का कारण होता है। एंजाइटी एंटी- और विटामिन एंटी-वायरल भी होता है। इसलिए इस बीमारी में एंजाइटी का प्रयोग किया जाता है।
6. बिमारी की बीमारी में-एंजाइटी का उपयोग ग्वॉइटर की बीमारी में भी किया जा सकता है। थायराइड बढ़ने के कारण गले में थायराइड की बीमारी होती है जिसमें गले में सूजन हो जाती है।
7. चोरों में भी शामिल-अध्ययन के अनुसार अंगीठा के कन्द का सेवन करने से भी सेवन को नियंत्रित किया जा सकता है।
8. बेहोशी में-रिपोर्ट के मुताबिक, यूगांडा के लोग अनिखित विक्टिम को अंगीता के कंद को फोम कर स्थापित किया जाता है।
9.एंटी-इंफ्लेमेट्री-एंजाइटी में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाया जाता है। यह सूजन से संबंधित किसी भी तरह के दर्द से राहत अप्लाई है। यानी यह अर्थराइटिस या जोड़ों के दर्द से राहत मिलती है।
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पहले प्रकाशित : 16 नवंबर, 2023, 17:49 IST
