तनुज पाण्डे/आदिवासी। देवभूमि उत्तराखंड के अपने खूबसूरत स्मारकों में से एक के रूप में जाना जाता है। यहां के खान पान, रहना सहन में कई तरह की वैरायटी पाई जाती है। देवभूमि उत्तराखंड के दो डायनासोर में बटा हुआ है कुमाऊं और गढ़वाल। इन दोनों सिद्धांतों की बोली, खान पान, रहना सहन, उत्तराखंड की विवधता को शामिल किया गया है। अगर यहां बात करें तो पहाड़ों के बीच चूल्हे पर स्वादिष्ट पहाड़ी खाने का स्वाद उंगलियां चटाने पर मजबूर कर देती है। यहां कई प्रकार के पहाड़ी व्यंजन बनाए गए हैं। भट्ट की दाल, भात, झींगुरे की खेड, मडुवे की रोटी, मडुवे की पूरी, चूल्हे की आग में बाकरे का शिकार, बागेश्वर की मछली, पालक का कपा भात, अन्य कई साडी व्यंजन शामिल हैं। क्वेश्चन स्वाद लाजवाब के साथ ही ये सेहत के लिए भी कई तरह से लाजवाब है।
नामांकित निवासी और लेजर ग्रुप ऑफ होटल्स के शेफ चंदन सिंह परिहार ने बताया कि उत्तराखंड के कलाकारों की शुरुआत सिल बट्टे में पिसे से होती है। इन पहाड़ी मसालों के कारण ही यहां के खाने वालों का स्वाद सबसे अलग होता है. उत्तराखंड के पहाड़ी इलाके में मिलने वाले ये संपूर्ण तरीके से प्राकृतिक और बिना किसी उत्पाद के पाए जाते हैं।
कई तरह के लजीज व्यंजन मंगाए जाते हैं पहाड़ में
शेफ चंदन सिंह परिहार ने बताया कि उत्तराखंड के कुमाऊं और गढ़वाल में लगभग एक जैसे तरीके के व्यंजन ही बनाए जाते हैं। जिनमें लजील घाट की दाल, भट्ट की चुड़कानी, रस भात, मदुए की रोटी, लिसवा, भांग की नकली, तिमुर की नकली, पहाड़ी रायता, झींगुर की खेड, के साथ ही कई तरह के व्यंजन बनाए जाते हैं। चूल्हे में पका के कारण और हिमालयी क्षेत्र में मिलने वाले मसाले (जंबू, इंद्राणी, तून, जखिया) के कारण इन मसालों का स्वाद और भी लाजवाब हो जाता है। उन्होंने बताया कि अगर उत्तराखंड के नॉन वेज खाने की बात करें तो यहां का चूल्हे में पाक शिकार बेहद ही स्वादिष्ट और सेहतमंद के लिए गर्मी की पेशकश करने वाला है इसके साथ ही उत्तराखंड के बागेश्वर में मिलने वाली कोल्ड वैली में पाई जाने वाली हिमालय ट्राउट फिश बेहद स्वादिष्ट होता है.
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पहले प्रकाशित : 17 नवंबर, 2023, 12:28 IST
