पवन सिंह/कुँवर उत्तराखंड के हर गांव में समुद्र तट पर “सना हुआ लेम्बोर्गन” खाया जाता है और इसके कई लाभ भी होते हैं जो आपके शरीर को फिट रखते हैं और आपके शरीर का तापमान बिल्कुल सामान्य होता है। क्या आपने कभी पहाड़ी का खाँचा बनाया है? पहाड़ी सामान्य टेम्पलेट की तुलना में काफी बड़ा होता है। यह उत्तराखंड में समुद्र के मौसम में उगता है। ऐसे में पहाड़ी लोग धूप सेंकते हुए इस नींबू का सेवन करते हैं। वैसे तो इस नींबू का सेवन कई तरह से किया जा सकता है। लेकिन पहाड़ों में “साना हुआ” खाना बेहद अनोखा है। शहर में रहने वाले पहाड़ी लोग भी झील का सेवन करते हैं।
बैस्ट में स्थित काया आयुर्वेद अस्पताल के डॉक्टर विनय खुल्लर ने बताया कि पहाड़ में नींबू का फल बड़े पैमाने पर ही चाव से खाया जाता है। जबकि खोज में पहाड़ के लोग इसे दही में सान कर दिखाते हैं। टेम्पलेट को इस तरह से सैन कर खाना दशकों से चला आ रहा है। ठंड में गुनगुनी धूप में बैठे कर नींबू सनकर खाने का अपना अलग ही मजा है। इन पत्तियों में साइट्रिक एसिड होता है, जो स्वास्थ्य के लिए काफी अच्छा होता है। इसके साथ ही यह शरीर को तरल के रूप में गर्म रखने का काम करता है।
इन तंबाकू का उपयोग किया जाता है
झील के मौसम में धूप में बैठे इस स्वादिष्ट साने वाले थीम को खाने का अपना अलग ही मजा है। आज हम आपको लेबोरेटरी साने का रासायनिक और साथ ही इसमें इस्तेमाल होने वाले सामग्री के बारे में भी चर्चा करेंगे। हिल को सबसे पहले छीला जाता है। फिर से छीले गए थीम के छोटे-छोटे टुकड़े मिलते हैं। साथ में सेंट्रा और माल्टा भी साझा करें। इसके साथ ही मूली और गाजर को भी अच्छे तरह से छील कर छोटा-छोटा काट लें। इन सभी को एक साथ मिलाकर इसमें भांग के साथ पिसी हुई चटनी, हरा धनिया, पिसा हुआ गुड़ और दही भी मिलाये। इसमें आप केला और अनार भी मिला सकते हैं जिसका स्वाद और फायदा मिलता है। यह अब पूरी तरह से तैयार है।
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पहले प्रकाशित : 17 नवंबर, 2023, 08:30 IST
