सत्यम कुमार/भागलपुर. डिप्रेशन का शिकार आज के समय में छोटे बच्चे भी हो रहे हैं। इसके बाद उन्होंने कई आत्मघाती कामद उठाए। इससे बचने के लिए भागलपुर के एक स्कूल में एंगर जोन बनाया गया है। इसमें डिप्रेस्ड बच्चों का प्राकृतिक इलाज होगा। शहर के डेवी स्कूल में एंगर जोन का गठन किया गया है। कार्यशाला में रमेश चंद्र शर्मा ने बताया कि एंगर जोन में ऐसे बच्चों को बुलाया जाता है जो लड़ते हैं या डिप्रेश्ड हो जाते हैं।
डीएवी कार्यशाला के रमेश चंद्र शर्मा ने बताया कि कई बार बच्चे एक-दूसरे को सलाह देते हैं। जिससे आपसी विवाद हो जाता है। पढ़ाई का दस्तावेज़ हो या कोई अन्य नी को लेकर भी चिल्ड्रन एक्सप्रेस हो जाते हैं। इन सभी नीड़ से मुक्ति को लेकर हम लोगों ने एंगर जोन बनाया है। एंगर जोन में वैसे ही बच्चे कहलाते हैं जो लड़ते हैं या डिप्रेशन में रहते हैं। वहाँ पर साड़ी नौकरियाँ होती हैं। अलग से शिक्षक को कंपनी से सही सहमति से बातचीत की जाती है। जिससे रीजन का पता चल गया कि आखिर क्या हुआ। बच्चा क्यों प्रकट हुआ. इन नामांकन-पत्र दाखिल करने के बाद उसे समझाएं और उस प्रवेश द्वार से प्रस्थान करें। जिससे बच्चों में पहले वाली ऊर्जा आ जाती है।
बच्चों को किसी भी चीज के लिए जबरदस्ती न करें
प्रमोशन की माने तो बच्चों को कभी भी किसी चीज के लिए जबरदस्ती नहीं करनी चाहिए। जिससे आपके बच्चे पर खतरा हो। हाल ही में कोटा में आत्महत्या जैसे कई मामले सामने आए। जब सुधीर लेकर से बात की गई तो उन्होंने बताया कि बच्चों में इंजीनियर या डॉक्टर बनने की इच्छा नहीं होती। लेकिन माता-पिता के इच्छा की वजह से वह उस विषय को चूज कर लेते हैं। बाद में कई बार जब उस विषय पर विरोधाभास लगता है, तो वह अवसाद का शिकार हो जाते हैं। माता-पिता को यह श्रेय देना होगा कि हमारा बच्चा कौन है। अंतिम समय में बच्चों का भविष्य तय हो जाएगा। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि जिस तरीके से मशीन में केपसिटी होती है, वह रेजिस्टेंस ही मशीन ले जाती है। यदि हम उसे अधिक भार देते हैं तो वह बुरा हो जाता है। या ब्लास्ट कर जाता है. इस तरह से काम करता है हमारा ब्रांड. अगर आपको इससे ज्यादा कुछ नहीं मिला तो आपको नुकसान ही होगा। लेकिन इन सबका बचाव एंगर जॉन है। बच्चे तुरंत वहां अपनी सारी चीजें लेकर आते हैं और उन्हें समझाते हैं।
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पहले प्रकाशित : 21 नवंबर, 2023, 16:38 IST
