इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में एमिटी यूनिवर्सिटी के एक स्ट्रक्चरल की रिकवरी पर सुनवाई करते हुए उसे बड़ी राहत दी और परीक्षा में बैठने की जगह दे दी। कथित तौर पर लैब के जर्नल में कथित तौर पर टेक्निकल कंपनी की परीक्षा में बैठने पर रोक लगा दी गई थी।
‘बार एंड बेंच’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, जिस वक्त दिल्ली की फैक्ट्री चलती रही और कोर्ट बंद थी। 16 नवंबर को हुई थी अंतिम तिमाही की समीक्षा, ऐसे में उच्च न्यायालय की रजिस्ट्री के प्रमुख न्यायमूर्ति प्रीतिंकर दिवाकर ने इसकी जानकारी दी। जस्टिस दिवाकर भी दिवाली की छुट्टियों में अपने घर पर छुट्टियां मना रहे थे, लेकिन उन्होंने 15 नवंबर को अपने घर पर ही कोर्ट में सामान इकट्ठा करने के लिए घर ले लिया।
उच्च न्यायालय ने क्या कहा?
उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि संकट और परिस्थितियों पर ध्यान दिया जाए, विशेष रूप से यह तथ्य कि प्रत्येक विषय का परीक्षण अनिवार्य रूप से किया जाए, आदेश दिया गया है कि वह 16 नवंबर को ‘मार्केटिंग इब्राहीम’ के परीक्षण में शामिल हो हो सकता है.
आरोप लग गया तो…
मामले की सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि इलेक्ट्रानिक का परिणाम उच्च न्यायालय के फैसले पर अविलंब था। उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि उपज का परिणाम न्यायालय द्वारा जारी किए बिना जारी नहीं किया जाएगा और यदि उपज के आरोप या कोई तथ्य गलत पाए गए हैं तो उस पर विश्वविद्यालय को भारी जुर्माना लगाया जा सकता है।
पूरा मामला क्या है?
डीटेल्स बता दें कि ऑर्केस्ट्रा इलेक्ट्रॉनिक्स ने अपने दावे में कहा था कि वह रेस्टॉरेंट क्लासेज अटेंड की थी, इसके बावजूद यूनिवर्सिटी की वेबसाइट में एक टेक्निकल कंपनी के ग्रुप ने आपको अटेंडेंट शोर्ट दिया। इस वजह से यूनिवर्सिटी ने परीक्षा देने से रोक दी। इसके होने के बाद सुपरमार्केट ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और परीक्षा में विश्राम शामिल था।
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पहले प्रकाशित : 21 नवंबर, 2023, 11:37 IST
