आखिरी बड़कुल/दमोह.मध्य प्रदेश के दमोह जिले के ग्रामीण क्षेत्र में बौद्ध भिक्षु की शुरूआत हुई है। पहली झलक कुआ सुसंगत गांव में देखने वालों को मिली। विद्यार्थियों की संख्या हर साल बढ़ती जा रही है। एक बड़ा बदलाव यह भी देखने को मिल रहा है कि प्राचीन काल की बी-प्लास्टिक को लोग पसंद करते हैं। की संभावना है लेकिन आप ये जानकर चौंक जायेंगे कि रामबाण का इलाज भी है कई शर्तिया. जिसमें हम एपेथेरेपी,बी-ओपेलीन बी और-वेनम थेरेपी के नाम से भी जानते हैं।
मेडिकल साइंस में इसे अल्टरनेटिव थेरेपी के नाम से जाना जाता है जिसका चलन देश में काफी हद तक देखा जा चुका है। ग्रेट ब्रिटेन के सागर और दमोह के ग्रामीण इलाकों में कई जगह निकाले गए, भाटियागढ़, पथरिया और सागर जिले के गढ़ाकोटा में इस पद्धति से इलाज किया जा रहा है।
300 पुरानी पद्धतियों से आज भी इलाज जारी
प्रमाणिकता के अनुसार यह चिकित्सा पद्धति करीब 300 साल पुरानी है। इस पद्धति में अभ्यास के डंक बी-वेन को सीधे शरीर में बनाए रखा जाता है। इसके बाद निराधार से निकला हुआ जहर गठिया के इलाज में काफी तरल पदार्थ है इससे घुघुनो में दर्द, पीठ दर्द, माइग्रेन, सीताका जैसी सख्त का रामबाण इलाज यह इलाज का डंक। इटासी की रहने वाली राजकुमारी सर्राफ की इस थेरेपी से चलने के दौरान बहुत ज्यादा आराम मिलता है, लेकिन अब 90% तक आराम मिलता है, कभी-कभी लगता है कि दर्द हो रहा है, कभी लगता है कि दर्द नहीं है। .
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पहले प्रकाशित : 22 नवंबर, 2023, 15:44 IST
