उत्तर
दुनिया की सबसे कीमती कूड़ा-कचरा अपनी दुर्लभता का कारण सबसे बड़ा कूड़ा-कचरा है।
हाल ही में विज्ञान की दुनिया में इसके टुकड़े काफी बढ़ गए हैं।
पिछले वर्ष की नीलामी में इस उत्पाद की कीमत से काफी कम बिक्री हुई थी।
कूड़ा शब्द को अक्सर बेकार की वस्तु को देखने के लिए प्रयोग किया जाता है। लेकिन मिट्टी की गंदगी माहिन चूरे को कहते हैं जो करोड़ों साल में बन जाती है। फिर भी इसकी कीमत नहीं है क्योंकि यह बहुत आसानी से हर जगह उपलब्ध है और इसकी बहुत उपयोगिता भी नहीं है। लेकिन हर तरह की गंदगी का यह हाल नहीं होता है। दुनिया में कई तरह की गंदगी होती है जो दुर्लभ होती है और उनकी कीमत उससे भी ज्यादा होती है। सोने का कचरा भी होता है काफी खतरनाक, लेकिन आप क्या जानते हैं दुनिया का सबसे बड़ा कचराघर कौन है? विद्वत की बात यह है कि यह कूड़ा पृथ्वी पर नहीं है।
चंद्रमा का नष्ट होना
दुनिया का सबसे बड़ा डस्ट मून की गंदगी है और पिछले साल ही इसे नीलामी में बेच दिया गया था, यही गंदगी थी जो 50 साल पहले अपोलो 11 अभियान के जरिए पृथ्वी पर रखी गई थी। प्रश्न यह है कि आखिर चाँद की धूल कितनी कीमती है। इसमें ऐसा क्या है जो इसकी कीमत बहुत ज्यादा है और असल में इसकी कीमत कितनी है. क्या विनाश इस कूड़े में कुछ खास है जो इसे मूल्यवान बनाता है या केवल इसकी दुर्लभता ने ही इसे अभी महंगा बनाकर रखा है।
तीन देश ही ला सके हैं इसे
अभी तक दुनिया के केवल तीन देश ही चंद्रमा से कूड़ा ला सके हैं। इनमें से अमेरिका और रूस जहां दशकों पहले यह काम कर चुके हैं तो चीन ने हाल ही में इसमें सफलता पाई है। जिस तरह से चंद्रमा पर अब दुनिया के कई देश अपने अभियान भेज रहे हैं और अमेरिका के दो पूर्व देशों में भी इंसान भेजे जा रहे हैं, चंद्रमा की गंदगी में काफी वृद्धि हुई है और इस पर और अध्ययन किया जा रहा है।
पृथ्वी पर चंद्रमा का कूड़ा कितना है?
अमेरिका के नासा के अपोलो अभियानों ने 382 किलों के चंद्रमाओं की चट्टानें और कूड़े के नमूने जमा किये थे जबकि सोवियत संघ ने अपने तीन अभियानों से केवल 300 ग्राम चंद्रमाओं के अवशेष हासिल कर लिये थे। वहीं चीन 3 किला के आदर्श लेकर आया है। लेकिन पिछले साल नासा द्वारा जारी किए गए एक वृत्तचित्र में पता चला कि चंद्रमा की गंदगी इतनी कीमती है।
चाँद की धुलाई कितनी कीमती है
मून की धूल की एक चुटकी की नीलामी पिछले साल न्यूयॉर्क के बोनहम्स में हुई थी जहां इसे करीब 504375 डॉलर की कीमत पर खरीदा गया था। जबकि कंक्रीट की बात हो रही है तो ये है कि पहले इस फिल्म की कीमत 8 से 12 लाख रुपये आंकी गई थी. इस नीलामी में आखिरी बोली 4 लाख डॉलर की लगी थी, लेकिन प्रीमियम, फीस आदि मिलाकर पूरी कीमत 504375 डॉलर की रही।
यह कूड़ा-कचरा इतना अधिक क्यों था?
यह कूड़ा-कचरा था जहां चंद्रमा पर उतरने वाले पहले व्यक्ति नील आर्मस्ट्रांग वहां से उतरे थे ही उठाया था। यही कारण है कि यह कूड़ा-कचरा इस कारण से ऐतिहासिक स्थलों पर बिक सकता है। लेकिन इसके बावजूद चंद्रमा अपने में बहुत मूल्यवान है क्योंकि यह आज ना केवल दुर्लभ है बल्कि मांग में भी है कि वे इस कूड़े का अध्ययन क्यों करना चाहते हैं।
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पहले प्रकाशित : 23 नवंबर, 2023, 12:22 IST
