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उर्दू शायरी: इक तिरा हिज्र दैमी है मुझे, वर्ना हर चीज़ आरज़ी है मुझे- तहज़ीब हाफ़ी


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न्यूज18

“मैं जिसके साथ कई दिन गुज़ार आया हूँ, वो मेरे साथ बसर रात क्यूँ नहीं…” तहज़ीब हाफ़ी की शायरी भावनाओं के धागों से एक ऐसी पोशाक तैयार करती है, जिसमें सारे भाव एक साथ उधड़ते चले जाते हैं। इन शेरों में दर्द है, सिद्धांत है, उम्मीद है और गहराई भी…



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